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करोड़ों की बर्बादी: 2.55 करोड़ में उपलब्ध मशीन को खरीदने के बजाय पीजीआई ने खर्च दिए 6 करोड़, उठी विजिलेंस जांच की मांग  

Sat, 12 Feb 2022 01:18 PM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

देश में ही इस मशीन को 2.55 करोड़ में बेचने वाले वेंडर ने इसकी शिकायत स्वास्थ्य मंत्रालय समेत अन्य उच्च अधिकारियों से कर विजिलेंस जांच की मांग की है। यह मामला प्रशासक के सलाहकार के पास भी पहुंचा है, जिसे पीजीआई निदेशक के पास भेजा गया है।
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पीजीआई में लगाई गई मशीन। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश के श्रेष्ठ चिकित्सा संस्थानों में शुमार चंडीगढ़ पीजीआई में मरीजों को बेहतर चिकित्सा सेवा देने के नाम पर मशीनों की खरीद में करोड़ों की बर्बादी की गई है। यह मामला पीजीआई के हिस्टोपैथालॉजी विभाग का है। देश में उपलब्ध 2.55 करोड़ की इंटिग्रेटेड फुली ऑटोमेटेड हिस्टोपैथालॉजी वर्क स्टेशन मशीन को दरकिनार कर एक दूसरे वेंडर से 6 करोड़ 5 लाख 23 हजार 74 पैसे में मशीन को खरीदा गया है। इतना ही नहीं, पीजीआई इस गलती को स्वीकार करने की बजाय मामले की लीपापोती करने में जुटा हुआ है।

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हैरान करने वाली बात यह है कि देश में ही इस मशीन को 2.55 करोड़ में बेचने वाले वेंडर ने इसकी शिकायत स्वास्थ्य मंत्रालय समेत अन्य उच्च अधिकारियों से कर विजिलेंस जांच की मांग की है। यह मामला प्रशासक के सलाहकार के पास भी पहुंचा है, जिसे पीजीआई निदेशक के पास भेजा गया है। सूत्रों का कहना है कि इस मामले में हिस्टोपैथालॉजी विभाग के उन तीन विशेषज्ञों की अहम भूमिका है, जिन्होंने परचेज ऑर्डर, प्राइज बीट और सप्लाई ऑर्डर पर हस्ताक्षर किए हैं। कंपनी का अभी 1.20 करोड़ रुपये बकाया है, जिसे विभाग भुगतान कराने की जल्दबाजी में है। 

मशीन में क्या-क्या जांचें होती हैं 

इस मशीन से मानव शरीर के किसी भी हिस्से (अंग) के कैंसर की जांच की जाती है। वहीं, पोस्टमार्टम के बाद सभी जरूरी जांचें इसमें होती हैं।

गलती सुधारने के बजाय डेढ़ करोड़ और फूंक दिए

हिस्टोपैथालॉजी विभाग में 2.55 करोड़ की मशीन 6 करोड़ में खरीदने के बाद गलती सुधारने के बजाय उसे और बढ़ाने का क्रम जारी रखा गया। तभी तो डेढ़ करोड़ की तीन और मशीनें खरीदें ली गईं, जिसकी सुविधा 6 करोड़ कीमत की मशीन में उपलब्ध है। उन तीन मशीनों में 39 लाख 67 हजार 188 रुपये का ऑटोमैटिक स्लाइड स्टेनर, 32 लाख 87 हजार 24 रुपये का ऑटोमेटेड फिल्म कवर स्लीपर और 14 लाख 96 हजार 875 रुपये का ऑटोमेटेड स्लाइड लैबरर शामिल है। 

उम्मीदों पर फिरा पानी, मरीजों की भी फजीहत 

छह करोड़ की मशीन खरीद के अनुबंध में विभाग के प्रमुख ने बताया था कि उससे मरीजों के साथ पीजीआई को भी कई तरह से फायदा होगा, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। मरीजों के लिए जांच शुल्क में रियायत की बात कही गई है, जबकि पहले जो जांच 100 रुपये में होती थी, उसे अब 500 रुपये कर दिया गया है। मानव संसाधन कम करने व जांचों की संख्या बढ़ने के बजाय 1800 से 800 हो गई है। 

विशेषज्ञ का जवाब... कुछ हजम नहीं हुआ 

इंटिग्रेटेड फुली ऑटोमेटेड हिस्टोपैथालॉजी वर्क स्टेशन मशीन खरीद में अनदेखी पर पूछे गए सवाल पर पीजीआई प्रशासन ने जो जवाब दिया है, वह हजम नहीं हो रही है। जिस पीजीआई के विशेषज्ञ देश-विदेश में होने वाले कॉन्फ्रेंस में शामिल होकर टेक्निकल स्किल की जानकारी लेते हैं, उनका कहना है कि उन्हें देश में उपलब्ध कम लागत वाली उस मशीन की जानकारी ही नहीं है, इसलिए उन्होंने 2.5 करोड़ के बजाय 6 करोड़ की मशीन खरीद ली। उधर, पीजीआई का दावा है कि यह देश का पहला संस्थान है, जिसने इस आधुनिक मशीन की खरीद की है, जबकि कालीकट (केरल) में कम लागत वाली मशीन काम कर रही है। 6 करोड़ की मशीन सभी मानकों का पालन करते खरीदी गई है। इस मशीन के साथ अन्य उपयोगी वस्तुएं भी दी गई हैं। वहीं, इसमें कम मानव संसाधन में तेजी से जांच करने की भी क्षमता है। 

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