बिना केवाईसी और दस्तावेज सत्यापन के नाम पर लोन देने वाली मोबाइल एप कंपनियां कोरोना काल के बाद एक बार फिर फलने फूलने लगी हैं। यह पहले तो सोशल मीडिया और एसएमएस के माध्यम से लोगों को बिना गारंटी के तत्काल लोन के लुभावने ऑफर देते हैं और जैसे ही लोग कंपनी का एप डाउनलोड करते हैं तो सॉफ्टवेयर मोबाइल से फोन नंबर, मैसेज और गैलरी में जाने की स्वीकृति भी ले लेता है। कंपनी के झांसे में आने के बाद उसके ओर से दी गई रकम से कई गुना अधिक पैसे वसूलते हैं। ऐसा न करने पर उसके संपर्क के लोगों को उसके खिलाफ मैसेज भेजने और उसका डाटा लीक करने की धमकी देते हैं।
इस तरह के मामलों में जरूरतमंद लोग सिर्फ इस कारण से फंस जाते हैं कि यहां उन्हें कोई कागजी कार्रवाई नहीं करनी पड़ती। कुछ ही समय में उनका लोन मंजूर हो जाता है। वहीं बैंक से लोन लेने के लिए कई तरह के दस्तावेज सत्यापन और अन्य प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।
आरबीआई ने इस तरह के मामले संज्ञान में आने पर एक जांच करवाई, जिसमें पाया गया कि देशभर में लगभग 1050 ऐसे लोन एप चल रहे हैं जिसमें से अधिकतर एप चीन से संचालित किए जा रहे हैं। इनमें से 600 एप ऐसे हैं जो अवैध तरीके से चल रहे हैं। शेष की कागजी जानकारी अधूरी है और सिर्फ 90 ही ऐसे एप हैं जिनका एड्रेस उपलब्ध है।
केस 1
सेक्टर-53 निवासी राजबाला ने एप के माध्यम से लगभग 50 हजार रुपये का लोन लिया था। कोरोना काल में लिए इस लोन की हर किश्त वह समय से चुका रहीं थी। इस बीच एक किश्त को जमा करने में दस दिन की देरी हो गई। लोन चुका देने के कुछ महीने बाद कंपनी से फिर से लोन देने के लिए फोन आने लगे। राजबाला के लोन लेने से मना करने पर उनसे दस दिनों की पैनल्टी की मांग की जाने लगी। जब राजबाला ने इसका विरोध किया तो उन्हें धमकाया जाने लगा।
थोडे़ से लालच के कारण लोग इस तरह के मामलों में फंस जाते हैं। इस तरह लोन देने वाली कंपनियों के झांसे में न आएं। ध्यान रखें बैंक कभी किसी तरह की निजी जानकारी आपसे नहीं मांगेगी। - महेश सेकड़ी, सेवानिवृत सीनियर मैनेजर, पंजाब एंड सिंध बैंक