हरियाणा के मनोहर लाल मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को हुई बैठक में अनेक अहम निर्णय लिए हैं। पांच साल में 25 हजार नए रोजगार सृजित करने का लक्ष्य है। 7 हजार 692 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया जाएगा। प्रदेश की कालोनियों में अवैध रूप से बांटे गए प्लॉट वैध हो सकेंगे। शहरों में पांच से दस एकड़ जमीन में भी लाइसेंसी कालोनियां विकसित की जा सकेंगी।
हरियाणा सरकार नए आवासीय एवं वाणिज्यिक उपयोग के लिए नई एकीकृत लाइसेंसिंग नीति (एनआईएलपी) लाई है। अब जनसंख्या के अनुसार सामुदायिक सुविधाओं का अपेक्षित प्रावधान जरूरी होगा। पांच से दस एकड़ में भी लाइसेंस लेकर कालोनी बना सकेंगे, इसमें एक शर्त रहेगी कि 25 एकड़ से नीचे की कॉलोनी के लिए दस प्रतिशत भूमि सरकार को जन सुविधाओं के लिए उपयोग के लिए देनी होगी।
अवैध रूप से उप-विभाजित प्लाट को नियमित करने के लिए सरकार नई नीति लाई है। इसका उद्देश्य नियोजित योजना में निर्धारित उपयोग को बदले बिना नगरपालिका क्षेत्रों में स्थित प्लाट को नियमित करना है। नीति के तहत केवल 1980 से पहले की नियोजित योजना में स्थित प्लॉट के नियमितीकरण और उप-विभाजन पर विचार किया जाएगा। नये उप-विभाजन के लिए पात्र न्यूनतम प्लॉट का आकार 200 वर्ग मीटर होगा। उप-विभाजित भूखंड का आकार 100 वर्ग मीटर से कम नहीं होगा।
उप-विभाजित प्लॉट में हरियाणा बिल्डिंग कोड 2017 के दिशानिर्देशों के अनुसार पार्किंग प्रावधान होने चाहिए। उप विभाजन के लिए 10 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से प्रतिभूति शुल्क लिया जाएगा। अवैध रूप से उप-विभाजित प्लाट और उप-विभाजन के नियमितीकरण के लिए 1.5 गुणा की दर से लाइसेंस फीस ली जाएगी। नए उप-विभाजन के लिए नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग की अधिसूचित लाइसेंस फीस (आवासीय प्लॉट) लागू होगी। प्रदेश में अनेक लोगों ने कालोनियों में प्लॉट को अपनी सुविधा अनुसार परिवार में बांट लिया है, जबकि ऐसी कोई नीति नहीं थी। उपविभाजन गैर कानूनी था, इसलिए सरकार यह नीति लाई है।
हरियाणा में निवेशकों पर नियमतीकरण भार कम करने और कारोबार की सहूलियत बढ़ाने के लिए मंत्रिमंडल ने हरियाणा उद्यम प्रोत्साहन (संशोधन) नियम, 2021 को मंजूरी दे दी है। अब एमएसएमई को 15 दिनों के भीतर जरूरी व्यावसायिक मंजूरी मिलेगी।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने प्रेस वार्ता में बताया कि सरकार ने ईको सिस्टम (पारिस्थितिकी तंत्र) बनाने के लिए हरियाणा उद्यम संवर्धन अधिनियम, 2016 और संबंधित नियम बनाए थे, जिसमें राज्य में कारोबार की सहूलियत के लिए उद्यमों को मंजूरी और अनुमोदन देने में देरी के साथ-साथ व्यवसाय करने की लागत को कम किया है। निवेशक एचईपीसी के ऑनलाइन पोर्टल 222.द्बठ्ठ1द्गह्यह्लद्धड्डह्म्4ड्डठ्ठड्ड.द्बठ्ठ के माध्यम से समयबद्ध तरीके से 23 से अधिक विभागों की लगभग 150 मंजूरी प्राप्त करने के लिए सामान्य आवेदन पत्र (सीएएफ) भर सकते हैं। व्यावसायिक मंजूरी मिलने के बाद एचईपीसी पोर्टल पर स्वचालित डीम्ड क्लीयरेंस का प्रावधान होगा। हरियाणा उद्यम और रोजगार नीति, 2020 नामक नई औद्योगिक नीति पहली जनवरी 2021 से 12 दिसंबर 2025 तक प्रभावी है।
पारदर्शिता और कारोबार की सहुलियत के लिए ठेकेदारों को सिंगल विंडो उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से ठेकेदार पंजीकरण नियम-2022, हरियाणा लागू करने के प्रस्ताव को हरियाणा कैबिनेट ने स्वीकृति प्रदान की है। नियमों के अनुसार, अब हरियाणा इंजीनियरिंग वर्क्स (एचईडब्ल्यू) पोर्टल पर ठेकेदारों की आईडी सृजित करना अनिवार्य होगा। इससे पंजीकृत योग्य ठेकेदारों को लाभ होगा क्योंकि उन्हें बयाना राशि जमा (ईएमडी) के भुगतान से छूट दी जाएगी।