हरियाणा राज्य फार्मेसी काउंसिल में बड़े स्तर पर प्रशासनिक अनियमितताएं पाई गई हैं। परिषद में पारदर्शिता की भारी कमी है और रजिस्ट्रार द्वारा लगाए गए आरोप लगभग सही पाए गए हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के आदेश पर आईएएस अधिकारी प्रभजोत सिंह की ढाई माह तक विस्तृत जांच में यह सामने आया है। आईएएस अधिकारी ने 22 पेज की रिपोर्ट चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव जी अनुपमा को सौंप दी है।
परिषद में सुधार के लिए जांच रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि किसी भी प्रकार के विवाद से बचने के लिए परिषद की बैठकों की वीडियोग्राफी कराई जाए ताकि बैठक में उपस्थित सदस्यों और एजेंटों को लेकर पारदर्शिता रहे। साथ ही पंजीकरण को ऑनलाइन किया जाए। इसके अलावा, एक्ट का हवाला देते हुए यह भी सुझाव दिया है कि कमेटी में कार्यकारी के स्थान पर स्थायी रजिस्ट्रार हो और वह पावरफुल हो। इसके लिए सिफारिश की गई है कि एचसीएस स्तर के अधिकारी को यहां रजिस्ट्रार लगाया जा सकता है।
काउंसिल के रजिस्ट्रार राजकुमार ने 10 जनवरी को सीएम को शिकायत देकर आरोप लगाया था कि रजिस्ट्रेशन पर हस्ताक्षर से लेकर सभी तरह से प्रधान का नियंत्रण है। रजिस्ट्रार के पास आधिकारिक डाक तक नहीं आने दी जाती है। नियमों के खिलाफ बैंक के सभी चेक पर अध्यक्ष धनेश अदलखा द्वारा हस्ताक्षर किए जा रहे हैं और उपप्रधान सोहन लाल बैंक खातों को डील कर रहे हैं। डायरी डिस्पेच से लेकर ऑफिस की ई मेल तक खोलने नहीं दी जा रही है। विभागीय सूत्रों का दावा है कि जांच में रजिस्ट्रार के ये सभी आरोप सही पाए गए हैं।