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ब्लड ग्रुप मैच न होने पर भी संभव होगा किडनी ट्रांसप्लांट

Sat, 03 May 2014 01:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली
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फोर्टिस अस्पताल के डॉक्टरों ने तीन ऐसे लोगों की किडनी ट्रांसप्लांट करने में कामयाबी हासिल की है, जिस केस में मरीज व किडनी दान करने वाले के ब्लड ग्रुप एक नहीं थे।
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इन मरीजों में ओम प्रकाश, संतोष कुमारी और सरोज शामिल हैं। उन्हें किडनी ट्रांसप्लांट के बाद नई जिंदगी मिली है। इन्कमपैटिबल किडनी प्रोग्राम की सर्जिकल डायरेक्टर डॉ. प्रियदर्शिनी रंजन ने बताया कि सभी मरीजों को अब अस्पताल से डिस्चार्ज किया जा चुका है।

शुक्रवार को प्रेस कान्फ्रेंस में डॉ. रंजन ने बताया कि कोई भी ट्रांसप्लांट मरीज किसी ऐसे व्यक्ति से अंग ले सकता था, जिसका ब्लड ग्रुप उससे मेल खाता हो। यदि ब्लड ग्रुप समान न हो तो डोनर से लिया गया अंग असुरक्षित माना जाता था। पर अब इम्यून कंडीशनिंग की प्रक्रिया से अलग ब्लड ग्रुप वाले डोनर से किडनी ले सकते हैं।
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इस मौके पर किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाले ओम प्रकाश ने बताया कि तीन साल पहले उनकी किडनी हाई ब्लड प्रेशर की वजह से फेल हो गई थी। वह डायलेसिस पर जी रहे थे, जब उन्हें किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह मिली। इस पर समस्या ये थी कि उनके परिवार में समान ब्लड ग्रुप वाला कोई डोनर नहीं था।

डॉ. रंजन ने बताया कि इसके बाद प्रकाशो देवी ने अपनी किडनी ओम प्रकाश को डोनेट करने का फैसला लिया। हालांकि उनका ब्लड ग्रुप टाइप ए था, जबकि मरीज का ब्लड ग्रुप टाइप-ओ। प्रकाशो के पास दूसरा रास्ता यह था कि अपने से मिलते-जुलते ब्लड ग्रुप वाले को किडनी दान कर सकती थीं।

साथ ही बदले में ओम प्रकाश के लिए टाइप ओ वाली किडनी ले सकती थीं। सरोज और संतोष के साथ भी कुछ ऐसी ही समस्या थी। इन सभी का ब्लड ग्रुप ओ था व किसी के पास मेल खाता डोनर नहीं था, लेकिन डॉक्टरों ने तकनीक के बल पर इस ऑपरेशन को सफल बनाया।
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