जस्टिस रणजीत सिंह (रिटायर) ने बेअदबी से संबंधित अपनी पुस्तक ‘द सैक्रिलीज’ में कांग्रेस और पूर्व की शिअद-भाजपा गठबंधन सरकार को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। पुस्तक में उन्होंने कहा है कि बेअदबी के लिए डेरा समर्थक जिम्मेदार थे, लेकिन पंजाब की कैप्टन अमरिंदर सिंह और चरणजीत सिंह चन्नी तथा इससे पहले प्रकाश सिंह बादल की सरकार लोगों को इंसाफ दिलाने में नाकाम रही। उन्होंने बेअदबी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों पर गोलियां चलवाने के आरोपी पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी को ब्लैंकेट बेल देने का मामला उठाते हुए हाईकोर्ट को भी कठघरे में खड़ा किया।
प्रेसवार्ता के दौरान जस्टिस रणजीत सिंह से सवाल पूछा गया कि चुनाव से ठीक पहले यह पुस्तक क्यों जारी की जा रही है। इस पर उन्होंने सफाई दी कि वह किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं, न ही उनका कोई राजनीतिक हित है। ऐसे में इस समय इस पुस्तक का विमोचन केवल एक संयोग मात्र है।
जस्टिस सिंह ने कहा कि बेअदबी मामले में सीबीआई सीधे तौर पर डेरा प्रेमियों को बचाने का प्रयास कर रही थी। जांच में सामने आया था कि पूर्व में जांच करने वाली एसआईटी पर भी मामले की जांच को आगे न बढ़ाने का दबाव था। राजनीतिक दबाव के चलते यह मामला आज तक सिरे नहीं चढ़ सका।
जस्टिस रणजीत सिंह ने कहा कि बेअदबी की घटनाएं 2015 से पहले भी होती रहीं, लेकिन तब न तो सरकार ने और न ही लोगों ने इसे गंभीरता से लिया। बरगाड़ी में बेअदबी की घटना के बाद लोग एकत्रित हुए और फिर प्रशासन भी इन घटनाओं के प्रति गंभीर हो गया। इसके बाद लोगों को हटाने का प्रयास किया गया और डीजीपी ने रात को डीसी को मैसेज भेजते हुए कहा कि दस मिनट का समय दो, पूरा शहर क्लीयर करवा कर चाबी आपके हाथ में थमा दूंगा। इसके बाद ही कोटकपूरा और बहिबल कलां में गोलियां चलीं और मासूम मारे गए।