हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और उपद्रव की घटनाओं के दौरान अफसरों की ओर से ड्यूटी निभाने में बरती गई लापरवाही और चूक की जांच कर रही प्रकाश सिंह कमेटी महीने के आखिर तक अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप देगी।
उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी पद्मश्री प्रकाश सिंह के नेतृत्व में गठित कमेटी में शामिल प्रदेश के एक वरिष्ठ आईएएस और एक आईपीएस अफसर ने इस पूरे प्रकरण की जांच की है। कमेटी में शामिल इन दोनों सदस्यों की व्यस्तता के कारण ही कमेटी के प्रमुख प्रकाश सिंह खुद ही रिपोर्ट को अंतिम रूप देकर इसे सरकार को सौंपेंगे।
आईपीएस केपी सिंह ने हरियाणा के डीजीपी का कार्यभार संभाल लिया है, तो हायर एजुकेशन के आला अफसर विजय वर्द्धन पिछले करीब एक सप्ताह से अवमानना मामले को लेकर अदालती कामकाज में व्यस्त हैं। कमेटी की सहायता कर रहे दोनों वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यों की सराहना करते हुए कमेटी प्रमुख ने कहा है कि उन्होंने अपने स्तर पर कार्यों का प्रदर्शन किया है।
दोनों अधिकारियों की व्यस्तता ज्यादा रही, लेकिन कमेटी का अधिकतर काम पूरा हो चुका है। कमेटी अपनी रिपोर्ट अप्रैल के अंत तक सौंप देगी। पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह ने बताया कि जांच के अधिकतर कार्य पूरे हो चुके हैं। कमेटी की कोशिश है कि जल्द रिपोर्ट तैयार कर इसे सरकार को सौंप दी जाए।
चुनिंदा अफसरों को पुरस्कृत करने की कमेटी करेगी सिफारिश :
कमेटी के सामने अधिकारियों की ओर से चूक के दर्जनों मामले सामने आए। वहीं दूसरी तरफ उन अधिकारियों की भी कमेटी सूची तैयार कर रहा है, जिन्होंने आंदोलन के दौरान सूझबूझ का परिचय देते हुए अपनी जिम्मेदारियां बखूबी निभाई। कमेटी की ओर से ऐसे अधिकारियों को पुरस्कृत किए जाने को लेकर भी प्रदेश सरकार से सिफारिश की जाएगी।
लापरवाही बरतने वाले अफसरों पर गिरेगी गाज :
पुलिस महानिदेशक केपी सिंह चूंकि इस कमेटी में बतौर सदस्य सभी पहलुओं का अध्ययन कर चुके हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई जल्द होगी। जांच के दौरान कमेटी ने उन अधिकारियों की पहचान कर ली गई है, जिन्होंने किसी भी तरह अपनी जिम्मेदारी निभाने में लपरवाही बरती है।