वर्ष 2022 में पुलिस ने अदालत में चालान पेश किया। इसमें आईपीसी की धारा 124ए व 153ए शामिल नहीं थी। हवारा ने अपने वकील के माध्यम से धारा 124ए व 153ए डिस्चार्ज करने की अदालत में याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया। इसके बाद आईपीसी की धारा 225, 511, 120बी के तहत पुलिस ने अदालत में चालान पेश किया। अदालत ने सबूतों के अभाव में हवारा को इन धाराओं में बरी कर दिया है।
1995 में बम ब्लास्ट में की थी हत्या, काट रहा है सजा
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की 1995 में बम धमाके में हत्या कर दी गई थी। मामले में जगतार सिंह हवारा को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। वह इस समय दिल्ली की तिहाड़ जेल में सजा काट रहा है। जगतार सिंह हवारा के खिलाफ मोहाली के सोहाना पुलिस थाने में 13 जून 1998 में देशद्रोह समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया था।
हवारा ने बताया था कि सोहाना में दर्ज इस एफआईआर की उसे जानकारी नहीं थी। इसकी जानकारी उसे तिहाड़ जेल प्रशासन की सूची के जरिए मिली थी। हवारा ने जानकारी मिलने के बाद 2019 में मोहाली की अदालत में एक अर्जी दायर कर केस के स्टेटस की जानकारी मांगी थी। इस केस के अन्य छह आरोपी पहले ही बरी हो चुके हैं।