विशेषज्ञों का कहना है कि यह लापरवाही भारी पड़ सकती है। सैनिटाइजर का प्रयोग भी अब न के बराबर किया जा रहा है। नतीजतन मास्क व सैनिटाइजर का बाजार भी ठंडा हो चला है। पहली लहर के दौरान मास्क और सैनिटाइजर के बाजार में बूम आया और देखते देखते उसकी डिमांड 200 प्रतिशत तक पहुंच गई थी।
सेक्टर-32 स्थित सर्जिकल आइटम के थोक विक्रेता केशव कुमार कहते हैं कि पहले मास्क और सैनिटाइजर की मांग महज 2 से 5 प्रतिशत की थी, इस कारण गिने-चुने थोक विक्रेता ही इसे मंगाते थे लेकिन कोविड काल में इसकी मांग इतनी ज्यादा बढ़ गई कि देखते-देखते 200 से 300 दुकानदारों ने इसकी बिक्री शुरू कर दी।
मेडिकल शॉप के अलावा जनरल स्टोर और बाजारों में बड़े स्तर पर मास्क और सैनिटाइजर की बिक्री की जा रही है। हालांकि तीसरी लहर के बाद अब डिमांड में बेहद कमी आ गई है। अब केवल 30 प्रतिशत लोग ही इसकी मास्क की खरीदारी कर रहे हैं जबकि 10 प्रतिशत लोग सैनिटाइजर खरीद रहे हैं।
कोरोना से बचाव में मास्क सबसे ज्यादा सहायक
स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार लोगों को आगाह कर रहे हैं। विशेषज्ञों की मानें तो कोविड के बदलते स्वरूप से बचाने में मास्क ही सबसे ज्यादा सहायक है। इसके अलावा हाथ धोने या सैनिटाइजर का प्रयोग करते रहना भी हमें संक्रमण की चपेट में आने से बचाता है। गौरतलब है कि कोविड के शुरुआती दौर में बचाव के लिए लोगों ने मास्क व सैनिटाइजर की खरीद इस कदर बढ़ा दी थी उसकी कालाबाजारी होने लगी थी। इस पर रोक लगाने के लिए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को कई अधिकारियों की टीम बनानी पड़ी थी। चेकिंग के दौरान कई जगहों पर 5 रुपये वाला मास्क 30 में व 90 रुपये वाला मास्क 500-600 रुपये में बिकता पाया गया था।
टीकाकरण के बाद भी जरूरी है मास्क, सैनिटाइजेशन: डॉ. सुमन सिंह
स्वास्थ्य निदेशक डॉ. सुमन सिंह का कहना है कि टीके की दोनों खुराक हों या प्रिकॉशन डोज, इन्हें लगवाने के बाद भी हमें नियमित रूप से मास्क लगाना होगा। बार-बार हाथ धोना या सैनिटाइज करना भी बेहद जरूरी है, क्योंकि वायरस का स्वरूप कभी भी बदल सकता है। सबसे ज्यादा सावधानी बच्चों और बुजुर्गों को बरतने की जरूरत है, क्योंकि बच्चों का एक बड़ा समूह अब भी टीके से दूर है।
मास्क और सैनिटाइजर को छोड़ने की गलती पड़ सकती है भारी: प्रो. विपिन कौशल
पीजीआई के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. विपिन कौशल का कहना है कि कोविड से बचाव को लेकर अब तक हुए सभी शोध में मास्क लगाने व हाथ धोने की आदत को जारी रखने का निर्देश दिया गया है। उससे साफ होता है कि टीकाकरण कराने और संक्रमित होने के बावजूद आगामी खतरों से बचाव के लिए हमें मास्क लगाना और सैनिटाइजर का प्रयोग करना छोड़ने की गलती नहीं करनी चाहिए।
पंचकूला: कोरोना का खतरा टला नहीं, बिना मास्क घूम रहे लोग
पंचकूला में अभी तक कोरोना का खतरा नहीं टला है, इसके बाद भी लोग नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। लोग बाजारों में बिना मास्क और सैनिटाइजर के घूम रहे हैं। इसके साथ ही मास्क और सैनिटाइजर की बिक्री भी केवल पांच फीसदी रह गई है। कोरोना की तीसरी लहर के बाद अब सभी जगह लोग नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। पुलिस की तरफ से चेकिंग कर चालान भी नहीं किया जा रहा है। शहर के शादी समारोह, मार्केट, जनसभा सहित सभी जगह लोग मास्क और सैनिटाइजर का प्रयोग नहीं कर रहे हैं।
पांच फीसदी रह गई है सैनिटाइजर की बिक्री
मास्क और सैनिटाइजर की बिक्री मेडिकल स्टोर पर कम हो गई है। अब कोरोना के केस घटने के बाद पांच फीसदी ही ब्रिकी हो रही है। लोग अब सुरक्षा के लिहाज से मास्क का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। वह केवल जरूरी काम और दफ्तर में काम से जाने के दौरान ही मास्क लगा रहे हैं। अब मास्क और सैनिटाइजर की बिक्री कम हो गई है। - पीयूष जैन, मेडिकल स्टोर मालिक , सेक्टर -16
सुरक्षा का लोग नहीं दे रहे ध्यान
कोरोना की पहली, दूसरी और तीसरी लहर के दौरान लोगों ने मास्क और सैनिटाइजर की खूब खरीद की थी लेकिन संक्रमण घटने के बाद अब लोगों ने मास्क की खरीद बिल्कुल बंद कर दी है। पहले रोजाना मास्क 300 तक बिक जाते थे लेकिन अब यह केवल पांच मास्क ही बिक रहे हैं। लोगों की लापरवाही से कोरोना दोबारा भी आ सकता है। - राजन गुप्ता, मेडिकल स्टोर मालिक, सेक्टर-15
मोहाली में भी लापरवाही कम नहीं
मोहाली में कोरोना संक्रमण दर जैसे-जैसे कम हो रही है तो कम ही लोग मास्क पहन रहे हैं और हाथों पर सैनिटाइजर का इस्तेमाल करने में भी लापरवाही बरतनी शुरू कर दी है। हालात यह हैं कि पहले मास्क और सैनिटाइजर मेडिकल स्टोरों पर सबसे ज्यादा बिकता था लेकिन अब इनकी बिक्री नाममात्र रह गई है। वहीं, कोरोना दिशानिर्देशों को लेकर लापरवाही का आलम यह है कि बाजारों में लोग शॉपिंग करते समय बिना मास्क के पहुंच रहे हैं और एक दूसरे से सामाजिक दूरी का पालन भी नहीं कर रहे हैं।
कोरोना महामारी ने जब देश में दस्तक दी थी और इसके बाद पैदा हुई स्थिति के बाद अधिकतर लोग मास्क और सैनिटाइजर अपने साथ लेकर चलते थे। लेकिन जैसे ही अब इसका प्रभाव कम हो रहा है तो लोग लापरवाही बरत रहे हैं। अब स्थिति यह है कि लोग मास्क और सैनिटाइजर का इस्तेमाल तब करते हैं जहां भीड़ हो या कोई पुलिस अधिकारी नाकाबंदी करके खड़े हों। यही हाल मेडिकल स्टोर वालों का है, इनके पास स्टॉक में मास्क और सैनिटाइजर तो मौजूद हैं लेकिन अब लोग इन्हें खरीद नहीं रहे हैं।
प्रिंस मेडिकल स्टोर के मालिक राजेश गर्ग ने बताया कि कोरोना की जब पहली लहर आई थी तो तब मास्क और सैनिटाइजर का स्टॉक कम आता था और खरीदने वाले अधिक होते थे। जबकि दूसरी लहर के दौरान मास्क और सैनिटाइजर की मांग में तेजी जरूर आई थी लेकिन जैसे ही इसका प्रकोप कम हुआ तो मास्क और सैनिटाइजर की बिक्री नाममात्र रह गई है।
जिला केमिस्ट एसोसिएशन के प्रधान अमरदीप सिंह ने बताया कि कोविड में जरूर मास्क और सैनिटाइजर की बिक्री अधिक हुई थी लेकिन इसके बाद कम होती चली गई। बाजार में मास्क और सैनिटाइजर के कारोबार में 15 से 20 फीसदी तक उछाल जरूर आया लेकिन संक्रमण की दर कम होने के बाद ज्यादा स्टॉक रखे होने की वजह से नुकसान उठाना पड़ रहा है।