हरियाणा के सरकारी विभाग आरटीआई को लेकर मनमानी कर रहे हैं। आवेदकों से आवेदन के साथ आईडी मांगी जा रही है। मई 2021 के बाद यह सिलसिला शुरू हुआ है। इससे प्रदेश के आरटीआई कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। विभाग आईडी न लेने के राज्य सूचना आयोग के आदेश भी नहीं मान रहे।
आरटीआई कानून 2005 में अप्रैल में संशोधन हुआ था, जिसे सामान्य प्रशासन विभाग ने पत्र जारी कर मई से प्रदेश में लागू करा दिया। इसके बाद आवेदनकर्ताओं से विभागों ने पहचान पत्र की प्रति के तौर पर आधार कार्ड, पासपोर्ट, वोटर कार्ड, पैन कार्ड, परिवार पहचान पत्र या सरकार से कोई अन्य आईडी की कापी लेनी शुरू कर दी।
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आरटीआई कार्यकर्ता व हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार का कहना है कि आरटीआई के साथ आवेदनकर्ता की आईडी आवश्यक रूप से संलग्न करने का नियमोें में स्पष्ट उल्लेख नहीं है। नियमोें के अंत में दर्शाए गए आवेदन के मॉडल प्रारूप में इस बारे में उल्लेख किया गया था। इसी वर्ष जून में तत्कालीन सूचना आयुक्त केजे सिंह ने एक मामले में दिए फैसले में स्पष्ट किया है कि कोई भी अधिकारी आरटीआई आवेदनकर्ता से ऐसे नहीं कह सकता है कि नियमोें में दर्शाए गए मॉडल प्रारूप में ही सूचना प्राप्त करने के लिए आवेदन दायर करें।
आवेदनकर्ता से सूचना मांगने का कारण स्पष्ट करने को भी नहीं कहा जा सकता है। आरटीआई कानून के अनुसार उससे उतना ही व्यक्तिगत ब्योरा मांगा जा सकता है जितना मांगी गई सूचना, जवाब भेजने के लिए पर्याप्त हो। आवेदनकर्ता को आरटीआई आवेदन के साथ आवश्यक रूप से उसका आईडी संलग्न करने को नहीं कहा जा सकता।