हरियाणा व पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सोमवार को आईएएस अजीत बालाजी जोशी और उनकी पत्नी आईएएस गौरी पराशर जोशी की ओर से जींद जिले की ऐतिहासिक धरोहर व संस्कृति पर लिखित कॉफी टेबल पुस्तक ‘इतिहास जीवन दृष्टि है, जल प्रवाह की तरह’ का विमोचन हरियाणा राजभवन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान किया।
राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि जिस प्रकार विश्व में अधिकांश देशों की पहचान केवल राजनीतिक रूप में होती है, वहीं भारत की पहचान एक सांस्कृतिक राष्ट्र के रूप में है। उन्होंने कहा कि भारतीय राष्ट्र के अस्तित्व की कल्पना नहीं की जा सकती, यहां पर व्यक्ति नर से नारायण बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के 50 वर्षों के बाद भी भारत को नहीं पहचाना जा सका। वर्ष 1997 में भी संसद के दोनों सदनों में भी इस पर चर्चा हुई थी और भारत को पहचान नाम से कई प्रतियोगिताओं और संगोष्ठियों का आयोजन किया गया था।
स्वामी विवेकानंद के जीवन से हमारी युवा पीढ़ी प्रेरणा ले सकती है जिन्होंने शिक्षा पर विशेष जोर दिया। उन्होंने दोनों अधिकारियों के प्रयासों की सराहना की, जिन्होंने युवा पीढ़ी के लिए भारतीय संस्कृति को पहचानने की जानकारी दिलाई।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि जींद हरियाणा का मध्य क्षेत्र है और यह जिला राजनीतिक रूप से काफी सचेत है, जिस कारण इस जिले की विशेष पहचान है। धर्मनगरी कुरुक्षेत्र की 48 कोस की परिधि में पड़ने वाले इस जिले का महाभारत से संबंध रहा है। यहां पर कई ऐतिहासिक धरोहर हैं, जो किसी न किसी भारतीय आस्था से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास इतिहास है, जो किसी भी रूप में अभिव्यक्त किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने अजीत बालाजी जोशी व गौरी पराशर जोशी द्वारा पुस्तक लिखने के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जोशी के उपायुक्त कार्यावधि के दौरान जींद जिले में आधार लिंक, भू-रिकार्ड और मोबाइल एप जैसे कार्य हुए हैं, जिनका सूचना प्रौद्योगिकी के इस युग में अहम स्थान है।
इस अवसर पर पुस्तक में अहम योगदान देने वाले जींद के फोटाग्राफर सन्नी चोपड़ा, प्रोफेसर बीबी चोपड़ा, जितेन्द्र अहलावत, सुनील धवन, चेतन गिरी को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव आरके खुल्लर, राज्यपाल की सचिव नीलम पी. कासनी के अलावा हरियाणा के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी व बड़ी संख्या में ट्राईसिटी के साहित्य प्रेमी भी उपस्थित थे।
218 पेज की पुस्तक में सहेजे हैं प्राचीन सभ्यता के चिह्न
यह पुस्तक 218 पृष्ठ की है, जिसके 6 अध्याय हैं। इनमें जींद जिले की प्राचीन कलाओं, पौराणिक स्थलों, जींद रियासत के इतिहास, किला व महलों के बारे वास्तुकला, संगीत के राग तथा खेत-खलिहान व प्राणी जगत, पक्षियों का संसार, प्रकृति के साथ जीने की कलाओं को समेटा है, जिसे भारत के किसी भी जिले का पहला फोटो गैजेटियर का रूप दिया गया है। सोमवार को राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने इस पुस्तक के मोबाइल ऐप का भी विमोचन किया। मोबाइल ऐप के जरिए अब जींद के सांस्कृतिक व ऐतिहासिक तथ्यों की जानकारी ली जा सकती है।
हरियाणा भर में बिखरे भित्ती चित्रों को संजोने का आग्रह
चंडीगढ़ के उपायुक्त अजीत बालाजी जोशी, जोकि जींद, सोनीपत, पानीपत, झज्जर व रेवाड़ी के उपायुक्त भी रह चुके हैं, ने पुस्तक के बारे में अपने विचार व्यक्त करते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से आग्रह किया कि प्रदेश भर में एतिहासिक इमारतों में प्राचीन भित्ती चित्रों का एक बहुत बड़ा खजाना है, जिसे सहेजने की जरूरत है। जोशी ने इस कार्य के लिए प्रयास किए जाने का आग्रह किया, जिस पर मुख्यमंत्री खट्टर के अलावा वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने भी सहमति जताई। इस मौके पर कैप्टन अभिमन्यु ने जींद में अपने ननिहाल में बिताए पलों की यादों को उपस्थित साहित्य प्रेमियों के साथ साझा किया। इस पुस्तक की लेखिका गौरी पाराशर जोशी इस समय हुडा पंचकूला की प्रशासक हैं।
चंडीगढ़ के इतिहास पर लिखेंगे कॉफी टेबल बुक
चंडीगढ़ के उपायुक्त अजीत बालाजी जोशी ने जींद जिले पर ‘इतिहास जीवन दृष्टि है, जल प्रवाह की तरह’ के विमोचन अवसर पर अपने स्वागत भाषण के दौरान एलान किया कि वे चंडीगढ़ के इतिहास पर भी ऐसी ही एक टेबल बुक तैयार करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जींद जिले पर तैयार की गई कॉफी टेबल बुक जिस तरह पहला सचित्र गजेटियर है, उसी तरह चंडीगढ़ के इतिहास का सचित्र गजेटियर तैयार किया जाएगा।