वहीं, पार्टी के यूथ विंग के प्रदेश उपाध्यक्ष जसविंदर सिंह गिल ने भी टिकट के लिए दावेदारी ठोकी थी। टिकट न मिलने के बाद उन्होंने भी बगावत करते हुए उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है और आजाद चुनाव लड़ने की घोषणा की है। जसविंदर सिंह गिल का कहना है कि वह पार्टी के साथ सेवा भाव से जुड़े थे। टिकट न मिलने पर उनका किसी से कोई गिला शिकवा नहीं है लेकिन वह जनता की सेवा के लिए आजाद चुनाव लड़ेंगे और जीत कर जनता की सेवा करेंगे।
कंग पर यह चीजें भी पड़ गईं भारी
जगमोहन सिंह कंग बेशक कांग्रेस पार्टी के काफी पुराने नेता हैं। पिछले 45 साल से वह कांग्रेस पार्टी से जुड़े हैं। कांग्रेस पार्टी से कई बार विधायक रहने के साथ-साथ तीन बार सरकार में मंत्री भी रहे हैं लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्हें आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी कंवर संधू से हार का सामना करना पड़ा था। तब से ही कांग्रेस पार्टी एवं हलके में उनकी पकड़ कमजोर होती चली गई। इसके अलावा मोहाली जिले में सिर्फ दो नगर परिषद खरड़ एवं नयागांव जहां पर कांग्रेस अपना प्रधान नहीं बना पाई थी। यह दोनों ही परिषद खरड़ विधानसभा हलके के अंदर ही आती हैं। इससे भी जगमोहन सिंह की पकड़ कमजोर होती चली गई।