मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत दूसरी शादी करने वाले भारतीय वायुसेना (आईएएफ) के अधिकारी की बर्खास्तगी को अवैध करार देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने उसे बहाल करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि मुस्लिम कानून में दो विवाह वैध हैं और याची ने एक देशभक्त सैनिक के रूप में अभी तक बेदाग सेवा की है। उसकी बर्खास्तगी आजीविका के अधिकार का उल्लंघन है।
पश्चिम बंगाल निवासी वायुसेना अधिकारी कलीमुल गाजी ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया था कि उसने 2012 में अपनी पहली शादी के वजूद में रहते हुए एक अन्य मुस्लिम महिला से शादी की थी।
नियमों के अनुसार कमांडिंग अधिकारी को मामले की रिपोर्ट के साथ-साथ यह सिफारिश भी देनी होती है कि कार्रवाई की जानी चाहिए या नहीं, साथ ही तर्क भी देना होता है। हालांकि, वर्तमान मामले में इसका पालन नहीं किया गया। इसके विपरीत, वर्तमान याचिकाकर्ता को बर्खास्त करने की अत्यंत कठोर सजा दी गई।
हाईकोर्ट ने यह भी माना कि अधिकारी ने भारतीय वायुसेना में अपनी सेवा दी है और एक देशभक्त सैनिक के रूप में उनका बेदाग रिकाॅर्ड है। अधिकारी का बर्खास्तगी आदेश कठोर, कथित रूप से किए गए अपराध के अनुपात से अधिक है। खंडपीठ ने यह भी कहा कि मुस्लिम कानून के तहत दूसरी शादी वैध है और पहली पत्नी ने अपने पति की दूसरी शादी के बारे में शिकायत नहीं की, जिसका अर्थ है कि उसने सहमति दी और दूसरी पत्नी के साथ रहने के लिए तैयार थी।