इस दौरान सहजधारी सिख संगठन ने एसजीपीसी चुनाव में मताधिकार की मांग को लेकर याचिका दायर की हुई थी। उस याचिका पर हाईकोर्ट की फुल बेंच सुनवाई कर रही थी। 20 दिसंबर, 2011 को हाईकोर्ट ने याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए केंद्र सरकार की वर्ष 2003 की वह नोटिफिकेशन रद्द कर दी थी जिसके तहत सहजधारी सिखों को मताधिकार से वंचित किया गया था। हाईकोर्ट की फुल बेंच के इस फैसले के खिलाफ एसजीपीसी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील कर दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने अपील पर अंतरिम आदेश जारी करते हुए 16 दिसंबर को जारी वह नोटिफिकेशन जिसके तहत बोर्ड का गठन किया गया था उसे अंतरिम तौर पर जारी रखने का निर्देश दिया था। 30 मार्च 2012 को सुप्रीम कोर्ट ने 15 सदस्यीय एग्जीक्यूटिव कमेटी के गठन के आदेश दिए थे।
याचिकाकर्ता बलदेव सिंह सिरसा ने हाईकोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार द्वारा 16 दिसंबर, 2011 को बोर्ड के सदस्यों के गठन की जो नोटिफिकेशन जारी की गई थी उसके तहत एसजीपीसी बोर्ड की पांच वर्षों की अवधि 16 दिसंबर, 2016 को समाप्त हो चुकी है। अब तय प्रावधानों के तहत एसजीपीसी बोर्ड के चुनाव करवाए जाने चाहिए। सिरसा ने हाईकोर्ट को बताया है कि उन्होंने यह चुनाव करवाने की मांग को लेकर केंद्र सरकार को 10 जनवरी, 2017 को एक रिप्रेजेंटेशन भी दी थी। बावजूद इसके केंद्र सरकार ने अभी तक एसजीपीसी बोर्ड के चुनाव करवाने की घोषणा ही नहीं की है।