हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल।
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हरियाणा में चालू शैक्षणिक सत्र में पांचवीं और आठवीं की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। सरकार ने दोनों कक्षाओं की बोर्ड परीक्षा लेने का फैसला एक साल के लिए टाल दिया है। स्कूल स्तर पर ही दोनों कक्षाओं की परीक्षा ली जाएगी। निजी स्कूल संचालकों, अभिभावकों के आग्रह पर सरकार ने यह निर्णय लिया है। निजी स्कूल संचालक इस सत्र से बोर्ड परीक्षा कराने का पुरजोर विरोध कर रहे थे।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अगले एक वर्ष के लिए 5वीं व 8वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं को फिलहाल स्थगित कर दिया है। इस वर्ष हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड इन परीक्षाओं को नहीं लेगा। पिछले दिनों बोर्ड ने दोनों कक्षाओं की परीक्षाएं लेने का निर्णय लिया था। इसके बाद कुछ अभिभावक, स्कूल प्रबंधक उनसे मिले और कोविड महामारी के चलते प्रभावित हुई पढ़ाई का हवाला दिया। उन्होंने परीक्षाएं टालने का आग्रह किया था। उनकी मांग को देखते हुए एक वर्ष के लिए परीक्षाएं बोर्ड के माध्यम से आयोजित न कराने का निर्णय लिया है।
शुरू से ही हुआ विरोध, परीक्षा फीस लेने पर और भड़के
पांचवीं और आठवीं की बोर्ड परीक्षा कराने के सरकार के निर्णय के बाद ही निजी स्कूल संचालकों ने विरोध शुरू कर दिया था। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंच गया। उसके बाद सरकार ने आठवीं की परीक्षा एससीईआरटी के जरिये स्कूल शिक्षा बोर्ड से करवाने का निर्णय लिया। बोर्ड ने आठवीं के बच्चों से 550 रुपये पंजीकरण व परीक्षा फीस लेनी शुरू दी, जिससे स्कूल संचालक व अभिभावक और भड़क गए। स्कूलों ने आंदोलन की चेतावनी दे दी। जिसे देखते हुए मुख्यमंत्री ने 25 फरवरी को 12 स्कूल एसोसिएशन की बैठक बुलाई थी। 2010 के बाद प्रदेश में पांचवीं व आठवीं की बोर्ड परीक्षा नहीं हुई है। नो डिटेंशन पॉलिसी के तहत बच्चों को अगली कक्षा में प्रमोट किया जा रहा है।
निसा ने स्टेट स्कूल स्टैंडर्ड अथॉरिटी के गठन की मांग उठाई
नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल्स अलाइंस (निसा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. कुलभूषण शर्मा ने आठवीं की बोर्ड परीक्षा न लेने के मुख्यमंत्री के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि सरकार नई शिक्षा नीति के अनुसार स्टेट स्कूल स्टैंडर्ड अथॉरिटी का गठन किया जाए। अथॉरिटी में हरियाणा के सभी बोर्ड से संबंधित स्कूलों को संख्या के अनुसार प्रतिनिधित्व मिले। ऐसा होने पर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा। उन्होंने मांग की है कि बोर्ड परीक्षा के नाम पर निजी स्कूलों से लिए गए शुल्क को अविलंब वापस लौटाया जाए।