फसलों पर लगातार बढ़ रहे कीटनाशक दवाओं के प्रयोग को कम करने और अप्रशिक्षित युवाओं की जिंदगी बचाने के लिए कृषि विभाग से सेवानिवृत्त डॉ. राजेंद्र सिंह अलख जगा रहे हैं। वे गांव-गांव जाकर किसानों और युवाओं को कीटनाशकों के नुकसान बताकर जागरूक कर रहे हैं। पांच साल में उनकी सलाह पर काफी युवा स्प्रे करना बंद कर चुके हैं। वहीं, 1600 युवाओं को स्प्रे का प्रशिक्षण भी दे चुके हैं। पढ़ें अन्य खबरें...
सोनीपत में बड़ी वारदात: हसनपुर में युवक की पीट पीटकर हत्या, शव गांव के खेल मैदान में फेंका
सोनीपत के गांव हसनपुर में एक युवक सुरेंद्र की डंडों से पीट पीट कर हत्या कर दी गई। उसका शव सुबह गांव के खेल मैदान में पड़ा मिला। मुरथल थाना पुलिस ने मृतक के भाई की शिकायत पर गांव के ही दो युवकों के खिलाफ हत्या का मामला दर्जकर छानबीन शुरू कर दी है।
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करनाल में हादसा: मिनी बस और ट्रैक्टर ट्रॉली में टक्कर, दो लोगों की मौत, चार अन्य लोग घायल
हरियाणा के करनाल में गढ़ी बीरबल रोड़ पर राजेपुर के पास सोमवार सुबह एक मिनी बस और रेत से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली की टक्कर हो गई। हादसे में असंध निवासी करीब 32 वर्षीय अनिल की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं इलाज के दौरान 30 वर्षीय प्रशांत ने दम तोड़ दिया। चार अन्य लोग घायल हैं।
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Haryana News: प्रदेश में पांच दिन का कोयला स्टॉक, समय पर कोयला आपूर्ति नहीं हुई तो छा सकता है बिजली संकट
कोयला आपूर्ति में कमी से पूरे देश में गहराते बिजली संकट के बीच हरियाणा के पास आगामी पांच दिन तक का कोयला स्टॉक है। अगर पांच दिन के बाद हरियाणा को कोयला की सप्लाई नहीं मिलती है तो बिजली संकट गहरा सकता है। हालांकि, मौजूदा समय में प्रदेश में मांग के अनुसार बिजली सप्लाई दी जा रही है। बिजली निगमों के अधिकारियों का दावा है कि आगामी कुछ ही दिनों में कोयला सप्लाई सुचारू हो जाएगी।
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पानीपत का मामला: लापरवाही की वजह से नवजात की जान गई फिर प्रसूता को भी जोखिम में डाला, तीन घंटे में कर दिया डिस्चार्ज
पानीपत के सिविल अस्पताल में स्टाफ की लापरवाही से पहले तो एक शिशु की जान चली गई। सिस्टम की लापरवाही यहीं तक नहीं रही अस्पताल प्रबंधन ने प्रसूता के साथ भी उचित व्यवहार नहीं किया। बच्चे के जन्म के तीन घंटे बाद ही जच्चा को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। ऐसा इसलिए किया गया कि अस्पताल प्रबंधन पर कोई आंच न आए।
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हरियाणा में डीएपी को लेकर मारामारी: स्टॉक में 40 हजार मीट्रिक टन खाद, मांग तीन लाख की
हरियाणा में धान कटाई सीजन के बीच में ही रबी की फसलों के लिए डीएपी खाद को लेकर मारामारी शुरू हो गई है। आपूर्ति कम होने के कारण प्रदेश सरकार के स्टॉक में इस समय मात्र 40 हजार मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है, जबकि सीजन में तीन लाख एमटी डीएपी की जरूरत रहती है। आलू और सरसों की अगेती किस्म की बिजाई के लिए किसानों की सरकारी खरीद केंद्रों और प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पैक्स) पर लाइनें लग रही हैं, लेकिन उन्हें खाद नहीं मिल रहा है। अभी से खाद को लेकर ये हालात हैं तो गेहूं बिजाई के सीजन में स्थिति और विकट हो सकती है।
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