हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल।
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हरियाणा सरकार ने फरीदाबाद नगर निगम घोटाले में कार्रवाई तेज कर दी है। बिना आपत्ति लगाए 200 करोड़ के बिल पास करने पर लोकल ऑडिट विभाग ने आठ ऑडिटर व एक वरिष्ठ ऑडिटर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इनका मुख्यालय पंचकूला स्थित लोकल ऑडिट विभाग का कार्यालय रहेगा। इन्हें निलंबन अवधि के दौरान जरूरी भत्ते मिलते रहेंगे।
लोकल ऑडिट विभाग के निदेशक राजेश कुमार गुप्ता ने जांच के आधार पर ऑडिटर के खिलाफ कार्रवाई की है। सुनील कुमार रेवाड़ी नगर परिषद और आकाश लाल फिलहाल रेवाड़ी स्थित इंदिरा गांधी यूनिवर्सिटी में बतौर ऑडिटर कार्यरत थे। पंचकूला लोकल ऑडिट कार्यालय में कार्यरत वरिष्ठ ऑडिटर नवीन कुमार, फरीदाबाद नगर निगम में कार्यरत अखिलेश्वर, दिलबाग सिंह, अमित, राजेंद्र सिंह, अशोक कुमार, जरीना को सस्पेंड किया है। ये सभी वर्ष 2017 से 2019 के बीच फरीदाबाद नगर निगम में बतौर ऑडिटर कार्यरत रहे।
ऐसे हुआ घोटाला
फरीदाबाद नगर निगम में वर्ष 2017 से 2019 के बीच सड़कों के निर्माण से लेकर अन्य कार्यों में करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ। इसकी पोल तब खुली, जब मौके पर काम हुए बिना ही भुगतान का खुलासा हुआ। वर्ष 2020 में घोटाले को निवर्तमान पार्षद दीपक, महेंद्र सरपंच, सुरेंद्र अग्रवाल सहित अन्य ने आईएएस यश गर्ग को शिकायत देकर उजागर किया था।
इन्होंने आरोप लगाया था कि वार्डों में बिना विकास कार्यों के ही करोड़ों रुपये की राशि सांठगांठ कर ठेकेदार को जारी कर दी गई। उस समय यह घोटाला 50 करोड़ रुपये का होने क आशंका जताई गई थी, जो जांच में 200 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। जांच में सामने आया है कि घोटाला 300 करोड़ से अधिक का है। विधायक नीरज शर्मा विधानसभा में आईएएस, मोहम्मद शाइन इत्यादि पर घोटाले में शामिल होने का आरोप लगा चुके हैं।