विभाग की ओर से फीस तो तय थी लेकिन आईटीआई संचालक इसका पालन नहीं कर रहे थे। नए नियमों के तहत ये भी प्रावधान किया गया है कि दाखिले के समय विद्यार्थी को पांच हजार रुपये की राशि बतौर सिक्योरिटी जमा करानी होगी। अगर किसी विद्यार्थी का दाखिला लेने के बाद नाम कट जाता है तो उसकी सिक्योरिटी राशि उसे नहीं मिल सकेगी। गौर हो कि हरियाणा में 150 के करीब निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान हैं और यहां पर अलग अलग कोर्स कराए जाते हैं।
नॉन अटेंडिंग के बदले अधिक फीस वसूलने के थे आरोप
बताया जाता है कि सरकार के पास रिपोर्ट पहुंची थी कि निजी आईटीआई संचालक विद्यार्थियों से नॉन अटेडिंग का कोर्स कराते हैं और अधिक फीस वसूलते हैं। हरियाणा सरकार ने इसे गंभीरता से लिया। इसके लिए दो साल के कोर्सों की फीस तय कर दी। मैनुअली के बजाय ऑनलाइन फीस जमा कराने से पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और इससे आईटीआई संचालकों की मनमर्जी खत्म होगी।
दाखिलों के लिए पोर्टल खोलने की मांग
हरियाणा प्राइवेट आईटीआई मैनेजमेंट एसोसिएशन के पूर्व प्रधान नरेश गुप्ता ने कहा कि केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुसार अन्य राज्यों की आईटीआई में दाखिले शुरू हो चुके हैं लेकिन हरियाणा में अभी तक पोर्टल नहीं खोला गया है। गुप्ता ने मांग की है कि दाखिले के लिए पोर्टल खोला जाए, ताकि निजी आईटीआई में विद्यार्थियों के दाखिले हो सके। इसके अलावा, ऑनलाइन फीस जमा कराने पर दो प्रतिशत राशि काटना गलत है, इस फैसले को वापस लिया जाए।