सोमवार को हरियाणा सरकार की ओर से जवाब दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया गया कि बैरिकेडिंग हरियाणा की सीमा में पंजाब की सीमा से 599 मीटर पहले की गई है। ऐसे में प्रदर्शनकारी हरियाणा के क्षेत्राधिकार में मौजूद थे। 21 फरवरी को आंदोलनकारियों ने पुलिस पर हमला किया और झड़प में कई पुलिसवाले घायल हो गए थे। उस दौरान पुलिसबल को प्रीतपाल खेतों में घायल मिला था और उसे इलाज के लिए नरवाना के सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। बाद में उसे पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया गया।
वहां पर प्रीतपाल के परिजन मौजूद थे और उनकी मर्जी के अनुसार प्रीतपाल को बाद में पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया। सरकार ने कहा कि प्रीतपाल पर न तो कोई एफआईआर है और न ही पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर प्रताड़ित किया है। ऐसे में यह याचिका रद्द की जाए। हाईकोर्ट ने अब प्रीतपाल की मेडिकल रिपोर्ट के लिए मामले की सुनवाई बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी है।
हाईकोर्ट ने दो दिन में मांगी मेडिकल रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट दाखिल न करने पर हरियाणा सरकार को जमकर फटकार लगाते हुए कहा कि हमने विशेष रूप से मेडिकल रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया था। बंदीप्रत्यक्षीकरण याचिका में आदेश का सही पालन न होना अवमानना के दायरे में आता है। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को दो दिन की मोहलत देते हुए मेडिकल रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।
क्या प्रीतपाल ने खुद को चोट पहुंचाई
हरियाणा सरकार ने दलील दी कि उस पर बल प्रयोग नहीं किया गया। उसे चोटिल हालत में अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। इस पर हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा कि आप क्या कहना चाहते हैं, क्या प्रीतपाल ने खुद को चोट पहुंचाई है। इन चोटों की हकीकत मेडिकल रिपोर्ट से सामने आ ही जाएगी।