2009 में हुए सर्वे को लेकर नहीं की गई कोई कार्रवाई, दोबारा सर्वे करने की बात दोहराई
कैंट एरिया में अलॉट की गई भूमि में अनियमितताओं को लेकर कंटोनमेंट बोर्ड की है याचिका
जुर्माने की राशि इस देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों से रिकवर करने की दी गई छूट
चंडीगढ़। 1899 से पहले अंग्रेजों की ओर से अनुदान में दी गई जमीनों के आवंटन की शर्तों में उल्लंघन को लेकर सर्वे में कोताही पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को जमकर फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए अब सर्वेक्षण को लेकर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए कंटोनमेंट बोर्ड ने बताया था कि अंग्रेजों के समय कुछ भूमि विशेष लोगों को अनुदान में दी गई थी। इसके लिए आवंटन की कुछ शर्तें तय की गई थी। समय बीतने के साथ ही इन शर्तों का बड़े पैमाने पर उल्लंघन होने लगा। इस बारे में बोर्ड ने सरकार को कई बार लिखा लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में उन्हें हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी। याचिका के जवाब में हरियाणा सरकार ने बताया कि अब वह सर्वे करने जा रहे हैं और कंपनी ने इसके लिए 15 जून तक की मोहलत मांगी है। इस दौरान कंटोनमेंट बोर्ड ने बताया कि इससे पहले भी 2009 में सर्वे किया था। लेकिन उसका कोई लाभ नहीं हुआ। हाईकोर्ट ने कहा कि जब 15 साल पहले एक प्रक्रिया पूरी की जा चुकी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई। क्यों अधिकारियों ने इस दिशा में ध्यान नहीं दिया। यह एक ओर अधिकारियों की सेवा में कोताही है तो वहीं दूसरी ओर सरकारी धन का दुरुपयोग है जिसकी अनुमति नहीं दी जा सकती। हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अब हरियाणा सरकार पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह राशि हरियाणा सरकार व आबकारी क्षेत्र के एस्टेट ऑफिसर को संयुक्त रूप से वहन करनी होगी। अगली सुनवाई पर हाईकोर्ट में सरकार को सर्वे के बारे में जवाब देना होगा और यह भी बताना होगा कि पूर्व में किए गए सर्वे पर अमल न करने का क्या कारण था।