चार माह पहले हुए लोकसभा चुनाव की हवा हरियाणा के विधानसभा चुनाव में बदल गई। दलों की रणनीति और प्रत्याशियों की मेहनत के चलते कई दिग्गज नेताओं के दुर्ग ढह गए और तो एकाध नेता ऐसे हैं, जो एंटी इंकम्बेंसी होते हुए भी अपना गढ़ बचाने में कामयाब रहे।
पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल अकेले ऐसे सांसद हैं, जिन्होंने अपने लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सभी नौ विधानसभा सीटों पर कमल खिलाया है। वहीं, दूसरे केंद्रीय मंत्री और गुरुग्राम से सांसद राव इंद्रजीत के 9 विधानसभा क्षेत्रों में से तीन पर कांग्रेस जीती है। रोहतक से कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा और सिरसा से सांसद कुमारी सैलजा ने भी लोकसभा चुनाव में अपने-अपने हलकों की सभी 9-9 सीटों पर एकतरफा बढ़त हासिल की थी, लेकिन विधानसभा चुनाव में ये सभी सीटों पर अपनी पार्टी के प्रत्याशियों को जितवा नहीं पाए।
करनाल : सभी नौ सीटों पर खिला कमल
लोकसभा चुनाव में मनोहर लाल ने अपने क्षेत्र में आने वाली सभी नौ सीटों पर बढ़त दर्ज की थी। 2019 के विधानसभा चुनाव में नौ में से तीन सीटों पर कांग्रेस और एक पर निर्दलीय प्रत्याशी जीता था। इस बार विधानसभा चुनाव में करनाल जिले की पांचों और पानीपत की चारों विधानसभा सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की। यहां पर कांग्रेस के बागियों ने ही पार्टी के समीकरण बिगाड़े।
गुरुग्राम : राव के गढ़ में कांग्रेस की एक सीट बढ़ी
मोदी सरकार के दूसरे मंत्री राव इंद्रजीत के क्षेत्र में लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 6 सीटों पर बढ़त हासिल की थी और मेवात जिले की तीन सीटों पर कांग्रेस आगे रही थी। विधानसभा चुनाव में भी मेवात की तीनों सीटों नूंह, पुन्हाना और फिरोजपुर झिरका से कांग्रेस ने जीत हासिल की है।
रोहतक : दो सीटें कांग्रेस ने गंवाईं
लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सभी 9 विधानसभा सीटों पर आगे रही थी, लेकिन विधानसभा चुनाव में सांसद दीपेंद्र हुड्डा अपना गढ़ नहीं बचा पाए। भाजपा ने कोसली में सेंधमारी कर दी और बहादुरगढ़ में निर्दलीय राजेश जून कांग्रेस पर भारी पड़े। कांग्रेस यहां 7 सीटें ही जीत पाई।
हिसार : भाजपा ने किया उलटफेर
लोकसभा चुनाव में छह सीटों पर कांग्रेसी सांसद जयप्रकाश और तीन पर भाजपा आगे रही थी। विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उलटफेर करते हुए यहां पांच सीटें जीतीं। तीन पर कांग्रेस और एक पर निर्दलीय सावित्री जिंदल ने जीत दर्ज की है। उचाना, नलवा और बवानीखेड़ा सीट पर लोकसभा चुनाव में कांग्रेस आगे थी, विधानसभा चुनाव में इन सीटों पर भाजपा जीत गई।
अंबाला : तीन सीटों पर भाजपा, छह पर कांग्रेस जीती
लोकसभा चुनाव में नौ विधानसभा सीटों में से कांग्रेस के सांसद वरुण चौधरी 5 सीटों पर आगे रहे थे, जबकि भाजपा ने 4 सीटों पर बढ़त बनाई थी। विधानसभा चुनाव में 3 सीटों पर भाजपा जीती है, जबकि 6 सीटों पर कांग्रेस के विधायक बने हैं। लोकसभा चुनाव में भाजपा पंचकूला, अंबाला कैंट, कालका और यमुनानगर क्षेत्र में आगे थी। इस बार कांग्रेस पंचकूला में जीत गई और भाजपा के पास सिर्फ कालका, अंबाला कैंट और यमुनानगर सीटें रह गईं।
कुरुक्षेत्र : लोकसभा चुनाव से भाजपा की दो सीटें घटीं
लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पांच सीटों पर बढ़त बनाई थी। इनमें रादौर, लाडवा, थानेसर, कैथल और पुंडरी विधानसभा क्षेत्र शामिल थे। विधानसभा चुनाव में लाडवा, पूंडरी और रादौर को छोड़कर शेष 2 सीटों पर कांग्रेस ने दर्ज की है। कुल 9 सीटों में से भाजपा के पास 3 और कांग्रेस के पास 6 सीटें हैं।
सिरसा : चार माह में चार सीटें घटीं
लोकसभा चुनाव में सभी नौ सीटों पर कुमारी सैलजा आगे रही थीं, लेकिन चार माह में ही हवा बदल गई। सिरसा, ऐलनाबाद, कालांवाली, टोहाना, रतिया क्षेत्र में ही कांग्रेस जीत पाई। रानियां और डबवाली में इनेलो और फतेहाबाद, नरवाना में भाजपा सेंध लगाने में कामयाब रही।
भिवानी : कांग्रेस की एक सीट घटी
लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 6 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी और कांग्रेस लोहारू, बाढ़ड़ा और चरखी दादरी में आगे रही थी। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस केवल दो सीटें लोहारू और नांगल चौधरी ही जीत पाई। आठ सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमाया।
फरीदाबाद : कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष से छीनी सीट
लोकसभा चुनाव में 6 विधानसभा सीटों पर भाजपा आगे थी और तीन सीटों हथीन, होडल और पृथला में कांग्रेस आगे थी। विधानसभा चुनाव में हथीन और पृथला में तो कांग्रेस को जीत मिली, लेकिन होडल से कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष चौधरी उदयभान को हार का सामना करना पड़ा।
सोनीपत : 4 से दो पर आई कांग्रेस
लोकसभा चुनाव में यहां की 4 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस जीती थी। इनमें खरखौदा, गोहाना, बरोदा और जुलाना शामिल हैं। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने खरखौदा और गोहाना सीट गंवा दी। यहां पर 6 सीटों पर भाजपा, 2 पर कांग्रेस और एक पर निर्दलीय जीता है।