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कब्जे के मुद्दे पर हुड्डा की बादल को खुली चुनौती

Wed, 06 Aug 2014 09:55 AM IST
हरीश लखेड़ा, प्रवीण पाण्डेय/अमर उजाला, चंडीगढ़
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हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (एचएसजीएमसी) के गठन के बाद प्रदेश में गुरुघरों पर कब्जा लेने की जद्दोजहद से भले ही तनाव का माहौल है लेकिन हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा इस मामले में पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रहे हैं।
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कानून के स्नातक हुड्डा ने अमर उजाला से विशेष बातचीत के दौरान अपने समर्थन में कई दस्तावेज दिखाकर यह साबित करने की कोशिश की कि उनकी सरकार का फैसला संविधान के दायरे में है।

इतना ही नहीं हुड्डा ने इस मामले को सियासी तूल दे रहे पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और एसजीपीसी प्रधान अवतार सिंह मक्कड़ को खुली चुनौती दी कि यदि वे कानूनी तौर पर सही हैं तो उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना चाहिए।
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दिल्ली में भी गुरुद्वारों के लिए अलग कानून है

अलग गुरुद्वारा कमेटी मामला केंद्र या राज्य का विषय होने के सवाल पर हुड्डा ने जोर देकर कहा कि गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी का गठन राज्य सरकार के क्षेत्राधिकार में आता है।

उन्होंने दलील दी कि नांदेड़ साहिब और पटना साहिब के अलावा दिल्ली में भी गुरुद्वारों के लिए अलग कानून है। एक सवाल पर हुड्डा ने सहजधारी बनाम केशधारी मामले का जिक्र किया और  कहा कि 2008 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले में गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी बनाने को राज्य का विषय माना गया था।

मुख्यमंत्री का कहना था कि बादल साहब 1925 के जिस गुरुद्वार एक्ट का हवाला देते हैं, उसे संसद ने नहीं बल्कि पंजाब परिषद ने बनाया था। इस कानून के तहत पाकिस्तान के गुरुद्वारों का भी प्रबंधन होता था, लेकिन आजादी के बाद पाकिस्तान ने अपने यहां के गुरुद्वारों के लिए अलग कानून बना दिया। पंजाब से अलग होने के बाद हरियाणा को इस तरह का कानून बनाने का हक है।

पंजाब पुनर्गठन कानून से भी हक मिला

अपनी दलील के समर्थन में हरियाणा के मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की पांच जजों की बेंच ने भी इसे अंतरराज्यीय विषय नहीं माना था। इसलिए यह केंद्र का नहीं राज्य का विषय है।

पंजाब पुनर्गठन कानून-1966 के तहत भी यह विषय राज्य का है। इस मामले में केंद्रीय गृह सचिव की ओर से राज्य सरकार को भेजे गए पत्र पर उन्होंने टिप्पणी से इनकार किया।

साथ ही कहा कि इसके बावजूद यदि बादल साहब और मक्कड़ को लगता है कि यह कानून गलत ढंग से बना है तो वे अदालत जाने के लिए आजाद हैं।

उन्होंने कहा कि यह कोई वित्तीय विधेयक नहीं है, यह विपक्ष का दुष्प्रचार है। वित्तीय विधेयक होने पर इसे केंद्र की मंजूरी जरूरी होती।
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सरकार ने कमेटी बना दी, फंड वे खुद जुटाएंगे

सरकार का काम एचएसजीएमसी का चुनाव करना और प्रबंधन कमेटी बनवाने तक सीमित है। वे अपने फंड का खुद इंतजाम करेंगे और प्रबंधन करेंगे। इसमें सरकार का कोई दखल नहीं होगा।

यह पूछे जाने पर कि चुनाव नजदीक आने पर ही यह कानून क्या चुनावी लाभ के लिए लाया गया है, तो हुड्डा का जवाब था कि उन्होंने तो हरियाणा के सिखों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करके उन्हें गुरुघरों की सेवा करने का अधिकार दिया है। इसमें चुनावी राजनीति नहीं है।
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