हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर
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हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से अमर उजाला चंडीगढ़ के स्थानीय संपादक और ब्यूरो चीफ ने खास मुलाकात की। पढ़ें स्पेशल इंटरव्यू।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नजर में हरियाणा कैसा चल रहा है?
प्रधानमंत्री जी हरियाणा को लेकर निश्चिंत हैं। मैने कई बार उनसे पूछा है कि कुछ कमी हो तो उजागर करें, लेकिन उनके यह शब्द थे कि नहीं सब ठीक चल रहा है। इस बार इंटर स्टेट काउंसिल की बैठक में सफलता की मिसालों में सात में से तीन उदाहरण उन्होंने हरियाणा के दिए। इनमें पेंशन स्कीम की सराहना की। केरोसीन फ्री बनाने के लक्ष्य की तारीफ की और छात्रों को दी जाने वाली स्कालरशिप की सराहना की। रेखांकित करना चाहूंगा कि हमने स्कालरशिप में फर्जीवाड़ा बंद कर दिया। स्कालरशिप को आधार कार्ड से लिंक करने के बाद ४० प्रतिशत नाम अपने आप कट गए। यह वे नाम थे जो छात्रवृत्ति के मानक पूरे ही नहीं करते थे।
सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार काफी चर्चा में है। उसकी जरुरत क्यों महसूस हुई?
विस्तार तो होना ही था। मंत्रिमंडल का आकार मानक से कम था। 15 प्रतिशत का मानक बना था। उसमें एक स्थान रिक्त था जो कि हमें कभी भी भरना था। हमने तीन और विधायकों को मौका दिया। अब इसके आगे गुंजाइश नहीं है। मैं 15 मंत्री तो बना नहीं सकता। अब तो फेरबदल ही हो सकता है।
क्या विभागों के बंटवारे से पहले मंत्रियो ने नाराजगी जताई थी?
नहीं। देखिए विस्तार या फेरबदल एक स्वाभाविक आवश्यकता होती है। शुरू में जब मंत्री बनाए जाते हैं तो कुछ लोग नए होते हैं, जिनको शुरू में बहुत कम विभाग दिए जाते हैं। कितने विभाग कौन संभाल पाएगा, यह धीरे-धीरे पता चलता है। धीरे धीरे क्षमताओं का पता चलता है। यह भी पता चलता है कि किस के पास आवश्यकता से ज्यादा विभाग चले गए हैं। जाहिर सी बात है जिसके पास अधिक विभाग होंगे उसी से लिए जाएंगे। मैने खुद अपने चार विभाग दिए हैं।
कैप्टन अभिमन्यु से सबसे ज्यादा विभाग लिए गए?
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर
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कैप्टन योग्य हैं इसी वजह से उन्हें अधिक विभाग दिए गए थे, लेकिन दूसरों को भी काम देना था। इसलिए उनके विभाग कम करने पड़े।
सिंहावलोकन करें तो सरकार के अब तक के लगभग दो साल के कार्यकाल को आप कैसे देखते हैं?
पहला साल परफारमेंस नहीं, परिचय का होता है। यह सभी लोगों को समझने का समय होता है। पहला साल हमारा ऐसा ही रहा। हां, अब हमारी सरकार की पहले साल की योजनाएं दूसरे साल में आकार लेने लगी हैं। सारे काम लाइन पर आने लगे हैं। सूबे के ७० विधानसभा क्षेत्रों का दौरा मैं कर चुका हूं। लगभग सभी स्थानों पर जनसभाएं की हैं। २० जनसभाएं बची हैं, जो कि दो माह के अंदर हो जाएंगी। बीच में मैने एक दिन में दो जनसभाएं करनी शुरू की थीं, लेकिन पार्टी की डिमांड आई कि एक दिन में एक ही जनसभा करें। इसलिए अब एक जनसभा करता हूं। सरकार की मंशा है कि प्रत्येक विधानसभा में सौ से दो सौ करोड़ तक के विकास कार्य करवाए जाएं।
इन जनसभाओं में नया क्या किया?
रचनात्मक रणनीति से काम किया। आमतौर पर जनसभाओं में अपनी बात कम दूसरे की आलोचना ज्यादा की जाती है। लेकिन हमने अपना एजेंडा बताना शुरू किया है कि हम क्या करेंगे। हम अपनी सकारात्मक सोच की करते हैं। पारदर्शी और अंत्योदय सरकार की बात करते हैं। यहां तक कि हमारी पुरानी सरकार के भ्रष्टाचार के मामलों पर पर भी फोकस नहीं करते। उनके बारे में तो जो कार्रवाई विभिन्न एजेंसियों या कोर्ट को करनी है, वे सहज रूप से होती ही रहेंगी।
क्या उस आरोप की भी यही वजह है कि वाड्रा के मामले में कार्रवाई में सरकार ढिलाई बरत रही है?
जी बिलकुल। वाड्रा के मामले में जांच चल रही है। जिनको जांच करनी है, वे कर रहे हैं। हमने ढींगरा आयोग को यह जांच सौंपी है। आयोग अपनी रिपोर्ट देगा। उसकी रिपोर्ट के आधार पर जो होगा वह करेंगे। लेकिन हम अपनी तरफ से कोई जल्दबाजी इस मोर्चे पर नहीं करेंगे। लोग भले ही आरोप लगाएं कि वाड्रा के मामले को मनोहर सरकार हल्के ले रही है। हमारा फोकस या वरीयता वह है ही नहीं। इस सबसे पहले जनसरोकार के काम करना हमारा लक्ष्य है।
सरकार ने भी भ्रष्टाचार को नाथने को अपनी प्राथमिकता बताया था। उस मोर्चे पर कितनी सफलता मिली?
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर
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हम जड़ पर प्रहार कर रहे हैं। सबसे पहले हमने यह जाना कि भ्रष्टाचार होता ही क्यों है। इसे वहीं कैसे रोका कैसे जाए। सरकारी नीतियों का मंथन किया। यह पाया कि जहां भी स्वैच्छिक अधिकार थे, यानी जहां डिस्क्रीशनरी पावर थी, वहीं भ्रष्टाचार पनपा। हमने अफसरों के ऐसे स्वैच्छिक अधिकार न्यूनतम करने पर काम किया। पारदर्शी नीतियां बनाई। तकनीक का सहारा लिया। पहले की सरकारों में पालिसी बाद में बनती थी। जिसको फायदा देना होता था, उनका नाम पहले तय हो जाता था।
फर्स्ट कम, फर्स्ट सर्व - के नाम पर ऐसी ही बंदरबांट वाली नीतियां लागू थीं। हम ऐसी पारदर्शी नीति बनाते हैं कि जो योग्य हो लाभ उसी को मिले। विजिलेंस जांच में सामने आया है कि पूर्व सरकार में जिन्हें लाभ दिया गया उनके नाम नीति बनने से भी महीनों पहले तय हो गए थे। कुछ मामलों में तो पालिसी बनने से पहले ही लाभ लेने वाले व्यक्ति ने अपने बैंक ड्राफ्ट बनवा लिए थे। हमने जो नीति बनाई है वह ऐसी है कि उसके तहत सबसे फार्म भरवाएंगे। उसके बाद मेरिट देखेंगे। इस मेरिट के लिए पैरामीटर तय करेंगे।
खास तौर पर हुडा के भूखंडों को लेकर बड़ी शिकायतें रही हैं?
मानता हूं। इसलिए नीति बदल रहे हैं। हरियाणा अर्बन डवलपमेंट अथारिटी के पास कई खाली प्लाट हैं। हमने कहा कि बचे हुए एक भी प्लाट अॅलाट नहीं किए जाएंगे। इन प्लाटों की बोली लगेगी। बोली की प्रक्रिया में जिसको अधिक कीमत देनी होगी, वह देकर प्लॉट ले जाएगा। कम से कम सरकार के कोष में बढ़ोत्तरी होगी।
हरियाणा की स्थापना के पचास साल इसी साल पूरे हो रहे हैं। कैसे मनाया जाएगा स्वर्ण जयंती समारोह?
सरकार इस आयोजन को बड़े स्तर पर मनाने की तैयारी कर रही है। हमने सभी लोगों की राय मांगी है। इस आयोजन के साथ हरियाणा की ढाई करोड़ जनता को जोड़ेंगे। साल भर होने वाले कार्यक्रमों में एक-एक गांव तक में कार्यक्रम होंगे। इस दौरान हरियाणा में एक खेलों का महाकुंभ भी करवाया जाएगा। जिसकी तैयारी सरकार कर रही है।
ग्रामीण स्तर पर कैसे ले जाएंगे समारोह?
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर
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गांव के बाहर सरकार गांव गौरव पट के नाम से शिला लगाएगी। जिस पर गांव के शहीदों के नाम, इतिहास, जनसंख्या और उपलब्धियां लिखी जाएंगी। देश के अन्य शहरों में भी जहां हरियाणा के लोग हैं, वहां कार्यक्रम करवाए जाएंगे। लोगों ने अपनी एसोसिएशन बना रखी हैं। हम मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और बंगलुरू जैसे शहरों में भी आयोजन करवाएंगे। यहां हरियाणा के लोग बड़ी संख्या में हैं। सरकार का कोई प्रतिनिधि इन आयोजनों में भाग लेने के लिए जाएगा।
लेकिन क्या इतने भर से स्वर्ण जयंती समारोह यादगार बन सकेगा?
और भी बहुत कुछ होगा। गीता जयंती का कार्यक्रम इसी बीच आएगा। सरकार इसका आयोजन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कुरुक्षेत्र में करेगी। इस समारोह में हम विदेश से उन लोगों को भी आमंत्रित करेंगे जो गीता के प्रचार और प्रसार से जुड़े हैं। सभी विभागों को कहा गया है कि वे अपनी तरफ से एक एक प्रोजेक्ट बनाकर लाएं और हरियाणा के विकास में योगदान करें। दूसरे शब्दों में हर मंत्रालय से कहा गया है कि वे स्वर्ण जयंती समारोह के लिए अपने एक विशेष कार्यक्रम का खाका पेश करें।
केंद्र ने नया वेतनमान लागू कर दिया है। हरियाणा सरकार कब तक इसे लागू करेगी?
हम भी देंगे। सरकार की मंशा सातवां वेतनमान देने की है, लेकिन यह विषय वित्त मंत्री से जुड़ा हुआ है। वे इस विषय पर अधिकारियों के साथ बैठक कर निष्कर्ष निकाल रहे हैं। जल्द ही वित्त मंत्री इसे तय कर लेंगे।
अगले तीन साल का सरकार का क्या विजन है?
योजनाएं तो बहुत सारी हैं। लेकिन मूल लक्ष्य यह है कि राज्य की जनता में हम जिम्मेदारी का अहसास पैदा करें। सरकार और प्रशासन में भी यह भाव पैदा कर रहे हैं। लेकिन समाज में, आम आदमी के बीच भी इसे बनाना जरूरी है। दुर्भाग्य से आज के दौर में समाज और सरकार आपस में ही भिड़े रहते हैं। समाज में यह भावना होनी चाहिए कि हम ही सरकार में है। यह सरकार हमारी है।
निर्बाध बिजली देना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है, कैसे पूरा करेंगे?
हरियाणा सीएम मनोहर लाल खट्टर
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हमने बिजली बिल भरने केलिए अपने प्रदेश की जनता को जिम्मेदार बनाना शुरू किया है। पहले की सरकारें यह काम नहीं कर पाईं। पूर्व सरकारों में नेता ही कहते थे कि बिल देने की जरूरत नहीं। हमने कहा कि बिजली उसी को मिलेगी जो बिल भरे। गांव के लोग अपने यहां के बिजली के तार बदलवाएं, कुंडी कनेक्शन से तौबा करें, बिजली का विधिवत कनेक्शन लें, बिल भरें। उन्हें हम धीरे-धीरे 24 घंटे बिजली देंगे।
कई जगह पर हमने 16 घंटे बिजली देनी शुरू कर दी है। पानी सिंचाई और पेयजल दोनों की समस्या है। हमने हरियाणा में निचले क्षेत्रों का सर्वे करवाना शुरू किया है। यानी प्राकृतिक गड्ढों वाले क्षेत्रों को झीलों में बदलने की तैयारी है। इन स्थानों पर 100 से 200 एकड़ क्षेत्र में झीलों का निर्माण करवाएंगे। इन झीलों का सौंदर्यीकरण करने के साथ ही इनमें मछली पालन भी होगा। बडख़ल झील में पानी कैसे लाया जाए। इसके लिए एक एजेंसी को लगाया है। एजेंसी की रिपोर्ट आते ही बडख़ल झील में भी पानी लाएंगे।
भर्ती प्रक्रिया पर उंगली उठ रही हैं। कैसे सिरे चढ़ेंगी भर्तियां?
भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जा रहा है। शानदार नतीजे मिल रहे हैं। सिफारिशी पर्ची वाला सिस्टम विदा हो चुका है। पुलिस भर्ती के लिए तीन लाख आवेदन आए थे। आज तक एक भी विधायक मेरे पास सिफारिश नहीं ले कर आाया कि अमुक व्यक्ति को भर्ती करवाना है। पुलिस भर्ती में पारदर्शिता है। कंप्यूटर चिप के माध्यम से सारा नोट होता है। इसलिए गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं है। दौड़ खत्म होने के साथ ही आवेदक को यह पता चल जाता है कि उसकी परफारमेंस क्या है। मैंने सिस्टम ऐसा बना दिया है कि मैं खुद चाहूं भी तो किसी की सिफारिश नहीं कर सकता।