हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल।
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सरकारी परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की कठिन प्रक्रिया से बचते हुए हरियाणा सरकार ने प्रदेश में भूमि बैंक बनाने का निर्णय लिया है। अब किसान सहित अन्य लोग मजबूरी में नहीं बल्कि मोलभाव कर सीधे सरकार को अपनी जमीन बेच सकेंगे। राजस्व विभाग इस भूमि बैंक को संभालेगा और जरूरत के अनुसार निगमों, बोर्डों या विभागों को हस्तांतरित करेगा।
गुरुवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस नीति को स्वीकृति प्रदान की गई। किसान को जमीन बेचने के लिए निदेशक भूमि अभिलेख के ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन करना होगा। इसके लिए उन्हें मूल्य सहित भूमि का पूरा विवरण देना होगा।
किसान सरकार को किसी विशेष स्थान पर विकास परियोजना के लिए भूमि का चयन करने का परामर्श भी दे सकते हैं। इस नीति को ‘बोर्डों एवं निगमों सहित सरकारी परियोजनाओं के लिए भूमि बैंक सृजित करने और विकास परियोजनाओं के लिए उनका निपटान नीति’ कहा जाएगा। इस नीति के लिए तीन समितियां भूमि एवं दर जांच समिति, भूमि बैंक समिति और उच्चाधिकार प्राप्त भूमि बैंक समिति का गठन किया जाएगा।
इसलिए लिया फैसला
यह देखा गया है कि कई बार भूमि मालिकों (खासकर विदेश में रहने वाले) को बाजार में बिचौलियों के दबाव या मजबूरन अपनी जमीन की बिक्री करनी पड़ती है। वहीं, विभिन्न विभागों को दिन-प्रतिदिन की जरूरतों को पूरा करने के लिए जलघरों, बिजली सब-स्टेशनों, कॉलेज और उच्च शिक्षा के अन्य विशिष्ट संस्थानों जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए भूमि उपलब्ध करवाने में बहुत कठिनाई का सामना करना पड़ता है। भूमि बैंक से योजनाएं जल्द सिरे चढ़ेंगी, क्योंकि सरकार को पहले से पता होगा कि किस जिले में कितनी जमीन उसके पास है।
नीति की मुख्य विशेषताएं
- राजस्व विभाग द्वारा अपनी परियोजनाओं के लिए नगर पालिका सीमा के भीतर और उससे दो मील की दूरी तक बनाने को इसे सरकारी विभागों को स्थानांतरित किया जा सकेगा।
- बोर्डों और निगमों सहित सभी विभाग ऐसी भूमि का पता लगाने का प्रयास करेंगे जो ‘शामलात देह’ में हों। इस जमीन का इस्तेमाल सरकारी कार्यालय स्थापित करने में हो सकेगा।
- हरियाणा नगर पालिका अधिनियम, 1973 और हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 के तहत अचल संपत्ति को राज्य सरकार को हस्तांतरित करने का प्रावधान है। ऐसे में ऐसी जमीन की भी तलाश की जाएगी।