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हरियाणा से पंजाब की सियासत में रार!

Tue, 14 Oct 2014 02:43 PM IST
अनिल भारद्वाज/अमर उजाला, चंडीगढ़
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हरियाणा के चुनावी रण में भाजपा के वरिष्ठ नेता नवजोत सिंह सिद्धू की शिअद के खिलाफ बयानबाजी ने पंजाब में दोनों दलों के रिश्तों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
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सिद्धू गत बुधवार हरियाणा विधानसभा चुनाव प्रचार में उतरे थे और उसके पश्चात एक के बाद एक शिअद, खासकर मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल के खिलाफ ताबड़तोड़ हमले किए।

इन हालात के चलते पंजाब में शिअद और भाजपा के अलग-अलग रास्तों पर चलने संबंधी चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाते हैं, ये तो वक्त बताएगा, लेकिन मौजूदा समय में अकाली-भाजपा गठबंधन के रिश्तों की तल्खी बढ़ती ही नजर आ रही है।
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परिवर्तन की संभावनाओं ने पकड़ा जोर

पार्टी की प्रदेश इकाई के संगठन में परिवर्तन की संभावनाएं भी एक बार फिर जोर पकड़ चुकी हैं। इस मसले पर सिद्धू के हमले लगातार तीखे हो रहे हैं जबकि प्रदेशाध्यक्ष कमल शर्मा चुप्पी साध गए हैं। बादल भी इस संबंध में कोई टिप्पणी करने से कतरा रहे हैं। हालांकि, शिअद के अन्य नेताओं के सिद्धू विरोधी बयान जरूर आए थे।

उसके बाद से शिअद की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। बदलाव से संबंधित बातों को इस नजरिए से भी बल मिलता है कि सिद्धू को शिअद के खिलाफ बोलने से राष्ट्रीय नेतृत्व ने रोका नहीं। वह ताबड़तोड़ हमले करते चले गए तथा उनके हरियाणा में प्रवेश से पंजाब में शुरू हुई सियासी हलचल ने और गति पकड़ ली।

शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष कमल शर्मा यह कहते हैं कि हरियाणा में अलग-अलग चुनाव लड़ने का असर पंजाब में गठबंधन पर नहीं पड़ेगा, लेकिन बदले हालात कुछ और ही इशारा कर रहे हैं।
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वेट एंड वाच की स्थिति में नेता

मौजूदा हालात में दोनों दलों के नेता वेट एंड वाच की नीति पर आ गए हैं। इसका कारण यह है कि लोकसभा चुनाव में किरकिरी के बाद पंजाब सरकार में शामिल भाजपाई मंत्रियों व प्रदेश पदाधिकारियों को बदलने की बातें भी जोर -शोर से उठी थीं।

उनके इस्तीफों की चर्चा भी हुई, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। इसलिए इस बारे में कोई भी सीधे तौर पर कुछ कहने को तैयार नहीं है।

इसका एक कारण यह भी है कि पंजाब में शिअद-भाजपा रिश्ता बहुत पुराना है तथा प्रदेश में पार्टी की स्थिति अन्य राज्यों की तुलना में इतनी मजबूत नहीं है।
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