पूर्व सीएम मनोहर लाल और पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला
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हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी और जननायक जनता पार्टी की गठबंधन सरकार साढ़े चार साल तक सरपट दौड़ी, लेकिन मंगलवार तक दोनों पार्टियों का कॉमन मिनिमम प्रोग्राम तय नहीं हो पाया। न्यूनतम साझा कार्यक्रम तय करने के लिए प्रदेश के गृह मंत्री अनिल विज की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी की तीन बैठकें जरूर हुईं, लेकिन गठबंधन की सरकार के आखिरी दिन तक इस कार्यक्रम को अंतिम रूप नहीं दिया गया। ऐसे में बिना साझा कार्यक्रम के मुद्दे तय हुए ही गठबंधन चला और टूट भी गया।
भाजपा की ओर से इस कमेटी में पूर्व कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ के अलावा मंत्री कंवरपाल गुर्जर को शामिल किया गया। जेजेपी की ओर से कमेटी में उकलाना से पार्टी विधायक अनूप धानक और चरखी दादरी के पूर्व विधायक राजदीप सिंह फोगाट शामिल किए थे।
इस कमेटी को भाजपा और जजपा दोनों के घोषणा पत्र का मिलान करके एक जैसे मुद्दों को एकत्रित करना था, साथ ही जो अलग-अलग विचारधारा के मुद्दे थे, उनको अलग करना था। इसके बाद दोनों पार्टियों के उन वादों और इरादों को इस कार्यक्रम में रखा जाना था, जिसे गठबंधन सरकार को पूरा करना था।
428 वादों पर विचार
चुनाव से पहले भाजपा ने प्रदेश की जनता के साथ 268 और जजपा ने 160 वादे किए। इन 428 वादों में 72 वादे ऐसे हैं, जो दोनों राजनीतिक दलों के चुनावी घोषणा पत्र में कहीं न कहीं मेल खाते थे। 12 घोषणाएं तो पूरी तरह कॉमन थीं। इन वादों को पूरा करने पर 15 से 20 हजार करोड़ रुपये का बजट खर्च होना संभावित बताया गया था।
बुढ़ापा पेंशन, किसान कर्ज माफी पर फंसा पेच
साढ़े चार साल में अधिकतर भाजपा के घोषणा पत्र पर काम हुआ। बुढ़ापा पेंशन 5100 रुपये, किसानों की कर्ज माफी और पुरानी पेंशन बहाली को लेकर पेच फंसा रहा। ये तीनों ही वादे जेजेपी ने किए थे, लेकिन मनोहर सरकार ने साफ कर दिया था कि वह एक साथ 5100 रुपये पेंशन नहीं करेंगे और न ही कर्ज माफी के अलावा ओपीएस बहाली होगी। जेजेपी का बड़ा वादा था कि निजी नौकरियों में हरियाणा के युवाओं को 75 प्रतिशत नौकरियां दी जाएंगी, लेकिन यह मामला हाईकोर्ट में फंस गया था।