मौत के बाद ये अंग किए जा सकते हैं दान
डॉक्टरों के मुताबिक मौत के बाद अंगदान करके एक व्यक्ति कम से कम आठ लोगों की जान बचा सकता है। ब्रेन डेड घोषित होने के बाद सभी अंग डोनेट किए जा सकते हैं। इसके लिए परिजनों की स्वीकृति लेना अनिवार्य है। ब्रेन डेड मरीज की किडनी, लीवर, फेफड़ा, पैंक्रियाज, छोटी आंत, वॉयस बॉक्स, हाथ, यूट्रस, ओवरी, फेस, आंखें, मिडिल ईयर बोन, स्किन, बोन, कार्टिलेज, तंतु, धमनी व शिराएं, कॉर्निया, हार्ट वाल्व, नर्व्स, अंगुलियां और अंगूठे दान किए जा सकते हैं।
कौन कर सकता है अंगदान
डायबिटीज से ग्रसित व्यक्ति भी अंगदान कर सकता है। कैंसर और एचआईवी से पीड़ित व्यक्ति, सेप्सिस या इन्ट्रावेनस दवाओं का इस्तेमाल करने वाले अंगदान नहीं कर सकते।
अंगदान में बाधाएं
- सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौत के मामले में नियम के अनुसार, केवल उन्हीं के अंग निकाले जा सकते हैं, जिनकी मृत्यु अस्पताल में होती है। इसके परिणामस्वरूप मौके पर मरने वाले व्यक्ति के परिजन अंगों को दान करने में असमर्थ हैं।
- एक अन्य प्रमुख कारण यह है कि बहुत से लोग अपने जीवनकाल में अपने अंगों को दान करने की इच्छा (निधन होने पर अंगों को दान करने के लिए पंजीकृत कराना) ही नहीं करते हैं।
- जागरूकता की कमी।
- धार्मिक मान्यताओं के प्रति विश्वास और गलत धारणाएं भी व्यक्तियों को अंगदान करने से बाधित करती हैं।
- जीवित रहते हुए दान किए जाने वाले अंग
- यकृत (लीवर), गुर्दा (किडनी), फेफड़े, अग्नाशय, आंत।
इनको है अंगदान का इंतजार
- अंग मरीजों की वेटिंग लिस्ट
- किडनी 1980
- लिवर 52
- पैंक्रियाज 21
- हृदय 1
- कॉर्निया 2654
ऐसे बन सकते हैं अंगदाता
इसके लिए नोटो और रोटो की वेबसाइट पर दिए गए फॉर्म नंबर 7 को ऑनलाइन भरके अपना पंजीकरण कराया जा सकता है । इसके अलावा पीजीआई में बनाए गए रोटो के ऑफिस से भी फॉर्म नंबर 7 प्राप्त कर उसे भरा जा सकता है। फॉर्म भर के जमा करने के बाद पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी हो जाती है। जिसके बाद पंजीकरण कार्ड प्राप्त किया जा सकता है।