पुलिस विभाग से जुड़े वेतन घोटाले में अपराध शाखा की टीम ने चंडीगढ़ पुलिस के एक पूर्व सीनियर कांस्टेबल को गिरफ्तार किया है। लगभग छह वर्ष फौज में नौकरी के बाद आरोपी वर्ष 1996 में चंडीगढ़ पुलिस में भर्ती हुआ था। वर्ष 2019 में उसने वीआरएस ले ली थी। आरोपी की पहचान नाभा साहिब, पटियाला निवासी 53 वर्षीय जसबीर सिंह के रूप में हुई है।
अपराध शाखा ने आरोपी जसबीर सिंह को जिला अदालत में पेश कर उसका दो दिन का पुलिस रिमांड हासिल किया है। आरोपी से गहन पूछताछ कर घोटाले से जुड़ी जानकारियां जुटाई जा रहीं हैं। इस मामले में पहले आठ आरोपी हत्थे चढ़ चुके हैं। सेक्टर-3 थाना पुलिस ने 25 फरवरी 2023 को इस मामले में आईपीसी की धारा 201, 409, 420, 467, 468, 471, 477ए, 120बी और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
दरअसल, कागजों में घपलाबाजी कर कुछ पुलिसकर्मियों के खातों में ज्यादा तनख्वाह डालकर इस घोटाले को अंजाम दिया गया था। पुलिस विभाग के खाता विभाग में कार्यरत मुलाजिमों के सहयोग से यह फर्जीवाड़ा किया गया। इससे सरकारी राजकोष को भारी नुकसान हुआ था। पुलिस ने इस मामले में इसी वर्ष अप्रैल माह में एएसआई विनोद कुमार और कांस्टेबल राजबीर सिंह के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दायर की थी। इससे पहले तीन चार्जशीट और दायर की जा चुकीं हैं। लगभग 1.1 करोड़ रुपये के इस वेतन घोटाले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था।
सूत्रों के मुताबिक पकड़े गए सीनियर कांस्टेबल जसबीर सिंह को पहले ही पता चल गया था कि मामले में खुलासा होने पर वह पकड़ा जा सकता है। ऐसे में उसने पहले ही वीआरएस ले ली थी। आरोपियों में बलविंदर कुमार, हवलदार नरेश कुमार, वरिंदर कुमार व कांस्टेबल सविंदर आदि शामिल थे। वर्ष 2020 में एक अज्ञात शिकायत मिलने के बाद इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था।
जांच में खुलासा हुआ था कि दिसंबर 2019 के वेतन में लगभग 35 खातों में तय वेतन से ज्यादा पैसे डाले गए थे। इस खुलासे के बाद अपराध शाखा को मामले की जांच सौंपी गई थी और पुलिस विभाग की प्रार्थना पर कैग द्वारा वर्ष 2015 से 2020 का विशेष ऑडिट किया गया था। इसमें 1.1 करोड़ रुपये का घपला सामने आया था। वाहन भत्ता और राशन/फूड भत्ता आदि की फर्जी एंट्री कर इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया था।