फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पीजीआई में आग: बचकर निकले मरीजों की आपबीती-नंगे पांव ही भागे बाहर, पैरों में चुभे कांच भी नहीं हुए महसूस

Wed, 11 Oct 2023 10:45 AM IST
निवेदिता वर्मा कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

सोमवार रात को पीजीआई के नेहरू एक्सटेंशन में आग लग गई थी। इस अग्निकांड में पीजीआई का करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। इसमें मेडिकल उपकरण, इमारत को होने वाला नुकसान आदि शामिल हैं। आग से निपटने के लिए पीजीआई दमकल के अलावा बाहर से दर्जन भर से ज्यादा गाड़ियां पहुंचीं थीं।
विज्ञापन
चंडीगढ़ पीजीआई में आग - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

चंडीगढ़ पीजीआई में सोमवार रात लगी भीषण आग से मरीज और तीमारदार अभी तक सहमे हुए हैं। हादसे के समय नेहरू एक्टेंशन के लेबर रूम में मौजूद सरहिंद की एक महिला मरीज ने बताया कि रात करीब साढ़े 10 बजे मेरी एक्सरे रिपोर्ट आई थी, जिसे लेकर मैं लेबर रूम पहुंची थीं। मेरे साथ वाले बेड गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी के लिए ऑपरेशन चल रहा था। इतने में हमें धुएं के अहसास होने लगा, आग लगने की आशंका से मेरे समेत सभी मरीज सहम गए। डॉक्टरों की टीम ने हौसला देते हुए मनोबल बढ़ाने की कोशिश की और हमें पीजीआई प्रशासन के निर्देश आने का इंतजार करने को कहा।

विज्ञापन


यह भी पढ़ें: Chandigarh: बिना फायर एनओसी चल रहा चंडीगढ़ पीजीआई, 16 में से 15 इमारतों में इंतजाम पूरे नहीं

दस-पंद्रह मिनट में दूसरे डॉक्टर, नर्स, पुलिस टीम पहुंची और जल्दी से बाहर निकलने को कहा। बाहर निकले तो कॉरिडोर में अफरा-तफरी मची हुई थी। मुझे चप्पल पहनने का भी समय नहीं मिला, इतनी घबराहट थी कि हमें नंगे पैर कांच भी महसूस नहीं हुए। मैं सिर्फ अपनी रिपोर्ट और कपड़ों का बैग लेकर बाहर भागी थी। महिला ने बताया कि वह छह दिन से पीजीआई में हैं। गर्भधारण में जटिलता के कारण उन्हें स्थानीय डॉक्टरों ने पीजीआई रेफर किया था।

विज्ञापन

कभी नहीं भूलेगी ये रात
महिला मरीज के पति रामजीवन ने बताया कि हादसे के समय वह कॉरिडोर में मौजूद थे। हर जगह धुएं का गुबार होने के कारण कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। सांस भी नहीं ली जा रही थी। हम लोग तीसरे तल पर थे, लाइट भी चली गई थी। सबने मोबाइल की बत्तियां जला रखीं थीं। बाहर निकलते ही मेरी तबीयत खराब हो गई और उल्टियां शुरू हो गईं। नेहरू एक्सटेंशन के बाहर मरीज, तीमारदार, डॉक्टर और भारी संख्या में पुलिस थी। हम पहली बार चंडीगढ़ आए थे, ये रात कभी नहीं भूलेगी।

हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर से कैंसर का इलाज करवाने आए मरीज के तिमारदार देशराज ने बताया कि उनके मरीज को ब्लड कैंसर है। नेहरू एक्सटेंशन में पिछले 21 दिन से उनके मरीज इलाज चल रहा था। उन्होंने बताया कि रात को हम लोग नेहरू एक्सटेंशन में ही थे, रोजाना मरीज की कीमोथैरेपी होती है, इसलिए वहां भर्ती किया गया था। रात को डॉक्टरों की टीम ने हादसे के बाद मरीज को एक्सटेंशन ब्लॉक में शिफ्ट कर दिया था। रात के बाद मंगलवार दोपहर को मरीज का इलाज फिर से शुरू किया गया है।
विज्ञापन

बहू का होना था बच्चेदानी का ऑपरेशन, अब कर रहे इंतजार
करनाल से बहू के इलाज के लिए पहुंचीं कांता ने बताया कि रात को जब आग लगी थी तो उस दौरान वह मैटरनिटी वार्ड में बहू के साथ मौजूद थीं। उसका बच्चेदानी का ऑपरेशन होना है। धुआं दिखते ही बहू को लेकर मुंह बांधकर हम रैंप से नीचे उतर आए। घबराहट के कारण हम लोग अपना सामान लाना ही भूल ही गए थे। बहू के ऑपरेशन का अभी तक समय नहीं मिल पाया है, हालात को देखते हुए पता भी नहीं चल पा रहा है कि कब तक इलाज होगा।
 
नेहरू एक्सटेंशन से इमरजेंसी तक बजे फायर अलार्म
सोमवार रात को आग लगते ही फायर अलार्म बजने शुरू हो गए थे। रात को 12 बजे तक पूरी बिल्डिंग में धुआं फैलने और शीशे तोड़ने के कारण बाहर निकले धुएं से लगभग 200 मीटर की दूरी पर स्थित इमरजेंसी बिल्डिंग में भी फायर अलार्म बजने शुरू हो गए थे। इससे आस-पास के क्षेत्र में अलर्ट पहुंच गया था। वहीं पांचों तल के अग्निशमन यंत्र भी मौके पर चले, लेकिन आग अधिक होने के कारण अधिक बचाव नहीं हो सका। बाहरी फायर ब्रिगेड की टीम की मदद से ही आग पर काबू पाया गया।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें