चंडीगढ़ पीजीआई के एडवांस ट्रॉमा सेंटर के फॉल सीलिंग में मंगलवार शाम 4:10 बजे शॉर्ट सर्किट से आग लग गई। वार्ड के पास एटीसी की लिफ्ट नंबर 5 की गलियारे में फॉल सीलिंग से धुआं निकलता देख अफरा-तफरी मच गई। पीजीआई प्रशासन ने दुर्घटना की आशंका को देखते हुए तत्काल मरीजों को अन्य वार्डों में शिफ्ट कर दिया। हालांकि, पीजीआई प्रशासन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी थी। इसमें किसी भी तरह के जानमाल की क्षति नहीं हुई है।
वार्ड में 60 मरीज थे भर्ती
ट्रॉमा सेंटर के पांचवी मंजिल पर वार्ड में उस वक्त प्लास्टिक सर्जरी, ईएनटी और ऑर्थोपेडिक्स विभाग के लगभग 60 मरीज भर्ती थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आग बुझाने वाले उपकरणों के माध्यम से लगभग 5 मिनट के अंदर आग पर काबू पा लिया गया लेकिन अगले आधे घंटे तक ग्राउंड फ्लोर तक धुआं उठता रहा। वहीं, फॉल सीलिंग के जंक्शन बॉक्स में लगी आग के कारण लगभग छह फीट का हिस्सा जल गया।
तत्काल बहाल हुई बिजली
पीजीआई प्रशासन के अनुसार 5वीं मंजिल पर ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग ऑफिसर और सुरक्षा गार्ड्स ने फॉल सीलिंग से निकलता धुआं देखकर तुरंत इसकी सूचना अग्निशमन विभाग को दी। इसके बाद अग्निशमन और सुरक्षा गार्ड्स की टीम ने 5 मिनट के अंदर आग पर काबू पा लिया। वहीं, इलाज प्रभावित होने के डर से अस्पताल के इंजीनियरिंग विंग को तत्काल घटनास्थल पर बुला लिया गया, जिसने शॉर्ट सर्किट के बाद जले हुए पैनल को हटाकर बिजली बहाल कर दी।
कारणों की जांच शुरू
पीजीआई प्रशासन घटना के कारणों की जांच में जुट गया है। वहीं, इंजीनियरिंग विभाग ने तार के टुकड़े को जांच के लिए एकत्र कर लिया। बता दें की एडवांस ट्रॉमा सेंटर 2011 में शुरू हुआ था। जहां चंडीगढ़ के साथ हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और आसपास के अन्य जिलों के ट्रॉमा के केस रेफर किए जाते हैं।
पिछली दो आग लगने की घटनाओं के बाद गठित जांच कमेटी ने बचाव के लिए दिए थे ये सुझाव
- अग्निशमन वाहनों के लिए पहुंच मार्ग/निर्दिष्ट अग्निशमन क्षेत्र खुले और खाली रखे जाएं
- नई ओपीडी में भूतल पर अग्नि निकास मार्गों को कांच/लकड़ी के दरवाजों से बदला जाए
- भारी वाहनों के आवागमन के लिए नेहरू अस्पताल के सामने क्रॉसिंग रोड बनाई जाए
- अस्पताल के विभिन्न ब्लॉकों में अग्नि निकास दरवाजे इस तरह से बनाए जाएंगे कि वे अंदर के बजाय बाहर की ओर खुलें
- संकट की स्थिति में सभी बंद स्थानों जैसे ओटीएस, आईसीयूएस वार्ड, लंबे गलियारों में उचित निकास की आवश्यकता हो
- गलियारों/सीढ़ियों को मुक्त आवाजाही के लिए साफ रखा जाए और वहां आग लगने का खतरा पैदा करने वाली कोई भी वस्तु नहीं रखी जाए
- मुक्त आवागमन के लिए कैटवॉक स्पष्ट होना चाहिए।
- मुख्य स्टोर के लिए अधिक स्थान अथवा अलग स्टोर की तत्काल व्यवस्था हो
- यह प्रस्तुत किया गया था कि नेहरू अस्पताल की इमारत 65 साल पुरानी है, मौजूदा बिजली केबलों, मैनिफोल्ड पाइपलाइनों और एयर कंडीशनिंग फिटिंग/प्रतिष्ठानों को नया रूप देने की जरूरत है।
- साइनेज को अधिक उपयोगकर्ता अनुकूल बनाया जाना चाहिए
- अप्रिय घटना से बचने के लिए मेन ओटी में 5वीं मंजिल पर स्थापित यूपीएस का जोखिम स्तरीकरण किया जाना चाहिए क्योंकि यह उचित रूप से काम नहीं कर रहा
- आग से बचने का मार्ग चौथी और पांचवीं मंजिल, मुख्य ओटी, नेहरू अस्पताल में बनाया जाए