चुनाव के दौरान पंजाब में लॉ एंड ऑर्डर बनाकर रखना एक बड़ी चुनौती साबित होती है। इसको लेकर राज्य चुनाव आयोग ने पहले से ही कमर कस ली है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी सिबिन सी ने बताया कि प्रदेश भर में 4 लाख लोगों के पास लाइसेंसी हथियार हैं। अगले 15 दिनों के अंदर लोकसभा चुनाव से पहले इन लाइसेंसी हथियारों को गन हाउस, डीसी कार्यालय और पुलिस थानों में जमा कराने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस संदर्भ में मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने प्रदेश के सभी जिला उपायुक्तों को आदेश जारी कर दिए हैं।
उन्होंने बताया कि कई मामलों में लाइसेंसी हथियार जमा नहीं कराए जाते हैं, इनमें कुछ लोगों को उनकी जान के खतरे या सुरक्षा कारणों से लाइसेंस हथियार जारी किए गए होते हैं, विशेष नियमों के तहत कुछ लोगों को और सुरक्षा से जुड़ी कर्मियों को ही हथियार रखने की अनुमति होती है, वह भी केवल ड्यूटी टाइमिंग के दौरान।
सिबिन सी ने बताया जो प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे होते हैं, उन्हें अलग से पुलिस द्वारा सुरक्षा मुहैया कराए जाने को लेकर कोई कानून या नियम नहीं हैं। केवल उन प्रत्याशियों को सुरक्षा मुहैया होती है, जिनकी जान को पहले से खतरा हो या किसी केस में उन्हें पहले से सुरक्षा मिली हो। अगर चुनाव के दौरान किसी प्रत्याशी को सुरक्षा को लेकर कोई समस्या तो वह अपने जिले के डीसी और थाना पुलिस को इसकी सूचना दे सकता है, उस पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
संवेदनशील पोलिंग बूथों के दृष्टिकोण में अमृतसर और होशियारपुर आगे
प्रदेश भर में 2,416 संवदेनशील बूथ बनाए गए है। सिबिन सी ने बताया इनमें सर्वाधिक संवेदनशील बूथ 578 अमृतसर में, 276 होशियारपुर और 150 के करीब गुरदासपुर में हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी सिबिन सी ने बताया संवेदनशील और अतिसंवेदनशील बूथों की संख्या आगे और बढ़ाई जाएगी, इसको लेकर पुलिस स्तर पर स्क्रीनिंग जारी है। इसके अलावा इलेक्शन ऑब्जर्वर कार्यभार संभालते ही अपनी निगरानी में पोलिंग बूथों का निरीक्षण करते हैं और अन्य कई स्टेशन को संवदेनशील बूथ घोषित करने को लेकर रिपोर्ट भेजते हैं। ऐसे में भविष्य में संवदेनशील बूथों की संख्या और बढ़ सकती है।
रैली में वाहनों की संख्या पर कोई प्रतिबंध नहीं, चुनावी खर्च में देना होगा ब्योरा
रैली या रोड शॉ के दौरान एक प्रत्याशी कितने भी वाहनों का प्रयोग कर सकता है, इसको लेकर कोई प्रतिबंध नहीं हैं। बर्शते रैली और रोड शो से पहले प्रत्याशी को सूचना देकर अनुमति लेना अनिवार्य है। इलेक्शन एक्सपेंडिचर आब्जर्वर को भी इसकी सूचना दी जाती है, ताकि उस प्रत्यााशी के रैली और रोड शो को उसके चुनावी खर्च में शामिल किया जा सके।लोकसभा चुनाव में इस बार एक प्रत्याशी का चुनावी खर्च 95 लाख रुपये रखा गया है। प्रत्याशी के अलावा कोई राजनीतिक दल अपने स्तर पर कोई जनसभा या रैली करता है तो उसका अलग चुनावी खर्च तैयार कर पार्टी के खर्च में शामिल किया जाता है।