साइबर क्राइम (सांकेतिक तस्वीर)
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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया है कि साइबर क्राइम से जुड़े मामले, खासकर महिलाओं व बच्चों के ये जुड़े मामले में एफआईआर दर्ज करने में किसी तरह की कोताही न बरती जाए। शिकायत मिलते ही तुरंत जांच कर एफआईआर दर्ज की जाए। साथ ही, साइबर अपराध संबंधी पोर्टल पर एफआईआर को नियमित तौर पर अपलोड किया जाए।
पंजाब की मुख्य सचिव विनी महाजन को भेजे पत्र में गृह मंत्रालय ने अपने 24 सितंबर, 2020 के पत्र का हवाला भी दिया है। इसमें कहा गया है कि मंत्रालय की तरफ से नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) के रूप में साइबर अपराधों की रिपोर्टिंग के लिए राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को एक तंत्र उपलब्ध कराया गया है। इस पर खास तौर से महिलाओं व बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों पर नजर रखने की व्यवस्था की गई है।
इस पोर्टल पर 30 अगस्त 2019 तक 3 लाख से भी अधिक साइबर अपराधों की शिकायतें दर्ज की गई हैं। वहीं, यह पोर्टल संबंधित राज्यों, जिला साइबर सेल और पुलिस थानों को साइबर अपराध संबंधी शिकायतों पर कार्रवाई करने का अधिकार भी प्रदान करता है। लेकिन हाल ही में जब इस पोर्टल की समीक्षा की गई तो यह देखने में आया है कि साइबर अपराध संबंधी शिकायतों के आधार पर एफआईआर दर्ज करने में बहुत लापरवाही बरती जा रही है।
इन शिकायतों के प्रभावशाली प्रबंधन के लिए जरूरी है कि साइबर अपराध संबंधी एफआईआर का स्टेटस नियमित तौर पर एनसीआरपी पर अपलोड किया जाए और शिकायतों का निपटारा तय समय में किया जाए। इसके साथ ही शिकायतों को तुरंत जांच के बाद एफआईआर के रूप में दर्ज किया जाए और अगली कार्रवाई के लिए क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रेकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) पर भेज दी जाए। यह सारी प्रक्रिया दस्तावेजी न करके पोर्टल पर अपलोड की जाए। इसके अलावा आनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी से बचाव के लिए नागरिकों को जागरूक भी किया जाए।
रेप-गैंगरेप की शिकायतों में सिर्फ 0.43 फीसदी में एफआईआर दर्ज
पत्र में बताया गया है कि अगस्त, 2019 तक एनसीआरपी पर साइबर अपराध संबंधी जो 2.80 लाख शिकायतें मिलीं, उनमें से 1.40 लाख शिकायतों को रद्द कर दिया गया। वहीं, 1.40 लाख पर कार्रवाई की जा रही है। लेकिन इन सभी मामलों में एफआईआर केवल 5608 शिकायतों पर ही दर्ज की गईं, जोकि कुल शिकायतों का 3.97 प्रतिशत है। इस अवधि के दौरान रेप और गैंगरेप की कैटेगरी में दर्ज किए 21000 साइबर अपराधों में से 16000 शिकायतों को सीधे तौर पर बंद कर दिया गया। केवल 4000 शिकायतों पर ही कार्रवाई की गई। इन शिकायतों में भी केवल 19 मामलों में एफआईआर दर्ज की गईं, जो कुल शिकायतों का मात्र 0.43 फीसदी है।