पंजाब विधानसभा में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने शुक्रवार को वर्ष 2023-24 का बजट पेश करते हुए विकास योजनाओं के लिए दिल खोलकर धन बांटा, लेकिन यह धन आएगा कहां से, इसकी कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई। पूरे बजट में वित्त मंत्री ने केंद्र सरकार द्वारा राज्यों के सहयोग से चलाई जा रहीं विकास और सामाजिक कल्याण योजनाओं को भी अपने बजट का हिस्सा बनाकर पेश कर दिया और उनके लिए बजट राशि का भी घोषणा कर दी।
तीन लाख करोड़ के कर्ज में डूबे प्रदेश के लिए वित्त मंत्री ने 1,96,462 करोड़ रुपये का बजट पेश किया, जो वर्ष 2022-23 की तुलना में 26 फीसदी अधिक है। वित्त मंत्री ने वर्ष 2022-23 के संशोधित अनुमान का हवाला देते हुए दावा किया है कि इस अवधि में राज्य जीएसटी 23 फीसदी, राज्य उत्पाद शुल्क 45 फीसदी, स्टांप व रजिस्ट्रेशन से आय 19 फीसदी, वाहनों से टैक्स 12 फीसदी और गैर-कर राजस्व में 26 फीसदी की अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है। इसी के आधार पर वित्त मंत्री ने वर्ष 2023-24 में कुल राजस्व प्राप्तियां 98852 करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया है, जिसमें राज्य का अपना कर राजस्व 51835 करोड़ रुपये और गैर-कर राजस्व 7824 करोड़ रुपये हासिल होने की उम्मीद है।
इसके अलावा 2023-24 के दौरान केंद्रीय करों का हिस्सा 18458 करोड़ रुपये और केंद्र से सहायता अनुदान 20735 करोड़ रुपये आंका गया है। इस तरह धन की आमद ठोस धरातल पर नहीं है। इसके अलावा, सरकार की प्रमुख देनदारियों में कर्ज व उसके ब्याज की अदायगी भी एक बढ़ा घटक है। वर्ष 2022-23 के दौरान सरकार ने कर्ज के मूलधन का 15946 करोड़ रुपये और कुल कर्ज पर ब्याज के रूप में 20100 रुपये अदा किए थे। नए बजट में वित्त मंत्री ने कर्ज का मूल 16626 करोड़ व ब्याज के रूप में 22000 रुपये अदा करने की बात कही है। यह राशि एसजीडीपी की 46.81 फीसदी बनती है, जबकि पिछले साल यह 45 फीसदी थी। इसके अलावा, वित्त मंत्री को बिजली व ट्रांसपोर्ट समेत सब्सिडी के रूप में 25000 करोड़ की व्यवस्था भी करनी है।
इन बड़ी देनदारियों के बाद भी बजट में खुले हाथों से खर्च का फैसला संदेह पैदा करता है। ऐसे में वित्त मंत्री ने केंद्रीय योजनाओं का सहारा लेकर बजट को ''रंगला'' बना दिया है। हालांकि उन्होंने केंद्र से पास बकाया राज्य के 9035 करोड़ रुपये और सीसीएल के 6155 करोड़ रुपये का उल्लेख भी बजट में किया है। बजट में जिन केंद्रीय योजनाओं को शामिल किया गया है, उनमें पराली जलाने से रोकने के लिए मशीनरी व उपकरणों के लिए 350 करोड़ रुपये, बागवानी में टिश्यू कल्चर की केंद्रीय योजना, प्रोसेसिंग और गोदामों के निर्माण की योजनाएं, पाम तेल की रिफाइनरी और प्लांट स्थापित करने, लंपी स्किन रोग से निपटने के लिए गोट पाक्स टीके, पशुधन व पोल्टरी का टीकाकरण, एससी व ओबीसी विद्यार्थियों की स्कालरशिप योजना, राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान, औद्योगिक मूल्य संवर्धन के लिए कौशल स्ट्राइव कार्यक्रम, कैंसर सक्रीनिंग मिशन, कौशल विकास की योजनाएं, दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, सुग्मय भारत अभियान, आशीर्वाद योजना, प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-3,केंद्रीय सड़क नीधि योजना शामिल हैं, जिनके लिए वित्त मंत्री ने बजट का प्रावधान किया है।