पंजाब में एक जनवरी, 2020 तक 10 साल या इससे अधिक अवधि के लिए सरकारी जमीन पर काश्त और कब्जा रखने वाले भूमि रहित, सीमांत या छोटे किसान अब सरकारी जमीन के आवंटन के योग्य होंगे। जमीन के आवंटन के लिए संबंधित उपमंडल मजिस्ट्रेट के पास आवेदन करना जरूरी होगा। योग्य आवेदक को एक्ट में निर्धारित भुगतान के बाद जमीन आवंटित कर दी जाएगी। यह जानकारी पंजाब की अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) रवनीत कौर ने दी।
पंजाब सरकार द्वारा भूमि रहित, मध्यम और छोटे किसानों के कल्याण के लिए ‘द पंजाब (वेलफेयर एंड सेटलमेंट ऑफ लैंडलेस, मार्जिनल एंड स्मॉल ऑक्युपैंट फारमर्स) अलॉटमेंट ऑफ स्टेट गवर्नमेंट लैंड एक्ट, 2021 को लागू किया गया। इसके अनुसार ऐसे किसान जमीन के आवंटन के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदक अधिकृत वेबसाइट
https://revenue.punjab.gov.in पर जा सकते हैं और अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट से एक्ट और नियमों को डाउनलोड कर सकते हैं।
धान की सीधी बिजाई में बठिंडा आगे
पंजाब में गिरते जल स्तर को देखते हुए राज्य सरकार ने इस बार धान की सीधी बिजाई पर जोर दिया है। इसके कारण पंजाब भर में इस तकनीक से छह लाख हेक्टेयर भूमि में धान की सीधी बिजाई की गई। पिछले साल के मुकाबले इस साल 23 प्रतिशत क्षेत्रफल में किसानों ने इस तकनीक का उपयोग किया है। बठिंडा के किसान राज्य भर में सबसे आगे रहे। उन्होंने 52.76 हजार हेक्टेयर में धान की सीधी बिजाई की है।
पंजाब रिमोट सेंसिंग सेंटर लुधियाना की रिपोर्ट के अनुसार अब तक सबसे अधिक क्षेत्रफल सीधी बिजाई के अधीन आया है। इस साल राज्य में धान के अधीन कुल क्षेत्रफल में से 23 प्रतिशत पानी की बचत करने वाली इस तकनीक के अधीन आ चुका है। राज्य में सीधी बिजाई की तकनीक अपनाने में बठिंडा के बाद श्री मुक्तसर साहिब और फाजिल्का जिलों में क्रमश: 46,820 हेक्टेयर और 45,850 हेक्टेयर क्षेत्रफल में किसानों ने सीधी बिजाई की है।
कृषि विभाग के निदेशक सुखदेव सिंह सिद्धू ने बताया कि बीते वर्ष तकरीबन पांच लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल धान की रिवायती बिजाई की जगह सीधी बिजाई के अधीन आया था, जिसमें श्री मुक्तसर साहिब के किसानों ने 46,510 हेक्टेयर क्षेत्रफल इस तकनीक के अधीन लाकर बाजी मारी थी। धान के मौजूदा सीजन के दौरान किसानों ने इस तकनीक को अपनाने में उत्साह दिखाया, जिस कारण इस बिजाई के अधीन क्षेत्रफल बढ़कर 6.01 लाख तक पहुंच गया है।