हरियाणा के सेवानिवृत्त जजों की एसोसिएशन ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उनके मेडिकल अलाउंस को मेडिकल बिलों के क्लेम में एडजस्ट करने को गलत ठहराया है।
उन्होंने मेडिकल अलाउंस जारी रखने की मांग की है। मामले में जस्टिस एसके मित्तल और हरिंदर सिंह सिद्धू की डिवीजन बेंच ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को नोटिस जारी कर एक मार्च तक जवाब दाखिल करने को कहा है।
एसोसिएशन ने एडवोकेट सुमित गोयल के माध्यम से दायर याचिका में कहा है कि प्रथम नेशनल जुडीशियल कमेटी (जस्टिस शेटी कमीशन) ने सेवानिवृत्त जजों को सर्विंग जजों के समान फिक्स मेडिकल अलाउंस की सिफारिश की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने यह सिफारिश मंजूर कर ली थी। हरियाणा सरकार ने साल 2006 में सिफारशें लागू करते हुए अलाउंस शुरू किया था और वर्ष 2010 में जस्टिस ई पद्मनाभन ने फिक्स मेडिकल अलाउंस 100 रुपये से बढ़ाकर 1500 करने की सिफारिश की थी।
याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस बढ़ी दर पर भी मुहर लगाई थी। इस तरह मासिक 1500 रुपये मेडिकल भत्ता मिलना शुरू हो गया था। इस भत्ते के अलावा आउट डोर मेडिकल बिल भी पास होते रहे, लेकिन पिछले छह-सात महीने से रजिस्ट्रार जनरल की ओर से आउट डोर मेडिकल बिल में फिक्स मेडिकल भत्ते को एडजस्ट करना शुरू कर दिया गया है। इस प्रकार फिक्स भत्ता बंद कर दिया गया है, जो गलत है।