चंडीगढ़ की व्यावसायिक इमारतों में ऊर्जा संरक्षण भवन कोड (ईसीबीसी) को लागू करने की तैयारी कर ली गई है। चंडीगढ़ प्रशासन के इलेक्ट्रिकल सर्कल ने ईसीबीसी को लेकर तैयार ड्राफ्ट को पब्लिक डोमेन में डाल कर सभी हितधारकों से सुझाव आमंत्रित किए हैं। इसके लिए तीस दिन का समय निर्धारित किया गया है। सुझाव मिलने के बाद ड्राफ्ट को हाई पावर कमेटी के समक्ष रखा जाएगा, जिसके बाद शहर में एनर्जी कंजर्वेशन कोड लागू की अधिसूचना जारी की जाएगी।
एक्सईएन कम नोडल अधिकारी एसडीए चंडीगढ़ राकेश चौहान ने बताया कि शहर के सभी हितधारक अपने सुझाव विभाग की वेबसाइट https://chdengineering.gov.in और सीधे ईमेल sdachandigarh@gmail.com पर भेज सकते हैं। इसके लिए 30 दिन का समय निर्धारित किया गया है।
गौर हो कि ईसीबीसी कोड के तहत शहर की इमारतों की ऊर्जा दक्षता में सुधार के लिए निर्माण को लेकर कई तरह के बदलाव प्रस्तावित हैं। चंडीगढ़ प्रशासन से इसको लेकर पहले भी कई बैठकें कीं, लेकिन यह प्रस्ताव सिरे नहीं चढ़ पा रहा था। ईसीबीसी को 2017 में अपडेट किया गया था और अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए गए, लेकिन शहर में इसे लागू करने के लिए केवल चर्चाओं का दौर ही चलता रहा है।
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बीते वर्ष 17 जून को सेक्टर-26 स्थित महात्मा गांधी राज्य लोक प्रशासन संस्थान में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने शहर में ईसीबीसी लागू करने को लेकर बैठक की थी। शहर में उद्योग के बाद बिजली खपत का दूसरा सबसे बड़ा कारण निर्माण कार्य है। माना जा रहा है कि वर्ष 2030 तक चंडीगढ़ सबसे बड़ा ऊर्जा खपत वाला क्षेत्र बन सकता है। इसलिए ईसीबीसी को जल्द लागू करना एक बहुत बड़ा मसला है।
रेस्को मॉडल पर ध्यान लेकिन बिजली बचत पर नहीं
शहर में रेस्को मॉडल के तहत सौर ऊर्जा को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसको लेकर बाकायदा चंडीगढ़ प्रशासन ने टेंडर भी जारी कर दिए हैं। लेकिन बिजली बचत को लेकर ईसीबीसी का प्रस्ताव लंबे अरसे से अटका पड़ा था। चंडीगढ़ में 2023 के अंत तक करीब 75 मेगावाट बिजली का सौर ऊर्जा से उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। दूसरी तरफ, ऊर्जा संरक्षण भवन कोड को लागू न होने से हर वर्ष 20-30 फीसदी बिजली बर्बाद हो रही है।
कोड लागू होने पर ये होंगे बदलाव
कोड के लागू होने के बाद शहर में बनने वाले सभी 100 किलोवाट से अधिक भार वाले नए व्यावसायिक भवनों में इसका पालन करना होगा। इसके तहत कई नियम होंगे, जिसमें सोलर सिस्टम अनिवार्य रूप से लगाना। खिड़की का आकार, कॉरिडोर में सेंसर समेत आदि कई बदलाव करने होंगे। बताया जा रहा है कि ईसीबीसी कोड लागू होने से शहर में 15-20 फीसदी तक बिजली की बचत होगी।
कोउ लागू होने से यह होगा लाभ
-हर वर्ष 20-30 फीसदी बिजली की बचत
-ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम होगा
-ऊर्जा की मांग घटेगी
-वातावरण खराब नहीं होगा