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यूपीएससी के परिणाम में ट्राईसिटी से डॉक्टर अक्षिता गुप्ता ने मारी बाजी

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चंडीगढ़। संघ लोक सेवा आयोग ने शुक्रवार की शाम सिविल सर्विसेज के अंतिम परिणाम जारी कर दिए हैं। टॉप 100 में चंडीगढ़ के सेक्टर 32 निवासी डॉ. अक्षिता गुप्ता ने जगह बनाई है। उन्हें 69वीं रैंक मिली है। वहीं शहर के ही सेक्टर-39 वासी डॉ. राजेश कुमार मोहन ने 102वीं रैंक पाई है। सेक्टर-सात निवासी अंकिता पुवार को 321वीं रैंक मिली है। इस बार भी सरकारी मॉडल स्कूलों ने सिविल सेवा में बेहतर प्रदर्शन किया है।
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सिविल सेवा के परिणाम शाम को जारी हुए तो कुछ देर तक वेबसाइट हैंग रही। हालांकि कुछ देर में ही परिणाम आने शुरू हो गए। ओवरऑल परिणाम की बात करें तो यूपीएससी ने 761 विद्यार्थियों को बेहतर पाया है। रैंक के मुताबिक उन्हें पद दिए जाएंगे। चंडीगढ़ की डॉ. अक्षिता गुप्ता ने पहली ही बार में यह परीक्षा पास कर ली। उन्होंने सेल्फ स्टडी की थी। इसी तरह अंकिता पुवार ने दूसरी बार परीक्षा दी थी। उन्होंने भी सेल्फ स्टडी की थी।
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एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान की तैयारी, तीन साल में मिली सफलता : अक्षिता
सिविल सेवा में 69 रैंक पाने वाली डॉ. अक्षिता को तीन साल पहले एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान आईएएस बनने का ख्याल आया और उसके बाद सिविल सेवा की तैयारी में जुट गई। तीन ही साल में उन्होंने मंजिल पा ली। कहती हैं कि आईएएस बनकर शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर काम करेंगी। उनके पिता पवन गुप्ता पंचकूला के सेक्टर-12ए स्थित मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में प्रिंसिपल हैं। उनकी माता मीना गुप्ता गवनर्मेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल रामगढ़ पंचकूला में गणित की लेक्चरर (व्याख्याता) हैं। माता-पिता बेटी की सफलता पर खुश हैं। कहते हैं कि बेटी ने 10वीं की पढ़ाई यमुनानगर के स्वामी विवेकानंद स्कूल से की थी और कक्षा 12 गवनर्मेंट मॉडल स्कूल सेक्टर-33 चंडीगढ़ से की। उसके बाद नीट में बाजी मारी और जीएमसीएच-32 से एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू कर दी। तृतीय वर्ष में सिविल सेवा में जाने का ख्याल आया और पढ़ाई शुरू की तो रुचि जगती गई। कहती हैं कि कोरोना के कारण घर में रहना हुआ और पढ़ाई के लिए अतिरिक्त समय मिल गया। युवा टाइम टेबल बनाकर नोट्स तैयार करें और नियमित अध्ययन करें। उनका भाई आईआईटी बांबे से पढ़ाई करके इंजीनियर बना है।
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जो पद मिलेगा, स्वीकार करते हुए आईएएस की तैयारी करूंगी : अंकिता
चंडीगढ़ के सेक्टर सात निवासी अंकिता पुवार ने सेल्फ स्टडी करते हुए 321वीं रैंक पाई है। उन्होंने दूसरे प्रयास में यह मंजिल पाई है। उनके पिता भूप सिंह पुवार पंचकूला स्थित साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग हरियाणा में साइंटिफिक इंजीनियर हैं। उनकी माता कमलेश पुवार गृहणी हैं। माता-पिता बेटी की सफलता पर खुश हैं। कहते हैं कि बेटी ने नाम कर दिया। अंकिता का कहना है कि उनका सपना आईएएस बनने का है। रैंक के मुताबिक जो भी पद मिलेगा, उस पर काम करते हुए आईएएस की तैयारी करेंगी। उन्होंने कक्षा 12 की पढ़ाई गवनर्मेंट मॉडल स्कूल सेक्टर-19 चंडीगढ़ से की है। उसके बाद उन्होंने आईआईटी रुड़की से बीटेक किया और वर्ष 2017 से 2019 तक बंगलूरू में इंजीनियर बनकर जॉब की। उन्होंने वर्ष 2019 में भी सिविल सेवा की परीक्षा दी, लेकिन सफल नहीं हो सकी। उसके बाद जॉब छोड़कर सिविल सेवा की तैयारी में जुट गई और दूसरी बार में मंजिल पाई। कहती हैं कि कोरोना ने पढ़ाई प्रभावित नहीं की। उन्होंने युवाओं से कहा है कि कड़ी मेहनत से ही सफलता मिलती है, बस अध्ययन लगातार होना चाहिए।
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