फीमेल मेडिसन वार्ड में भर्ती किए गए डेंगू के मरीज।
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डेंगू से एक तरफ स्थिति बेकाबू होती नजर आ रही है, दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी इसे और बढ़ाने का काम कर रही है। आलम यह है कि जीएमएसएच-16 में डेंगू के मरीजों को भर्ती कर इलाज करने के मानक की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। अस्पताल की इमरजेंसी में बनाया गया 20 बेड का डेंगू वार्ड फुल हो चुका है। अब इमरजेंसी से लेकर अस्पताल के लगभग प्रत्येक वार्ड में डेंगू के मरीजों को बेड की उपलब्धता के आधार पर भर्ती किया गया है। छठे तल पर स्थिति फीमेल मेडिकल यूनिट एक और दो में लगभग 40 मरीज भर्ती हैं। उन मरीजों में लिवर, सामान्य बुखार, डेंगू, सर्जरी, ईएनटी और अन्य बीमारियों के मरीजों को एक साथ रखा गया है।
चौंकाने वाली बात यह है कि डेंगू के मरीजों के बगल में लेटे अन्य मर्ज से ग्रस्त व्यक्ति को इसकी जानकारी तक नहीं है कि यह उसके लिए खतरनाक साबित हो सकता है। अस्पताल के डॉक्टर और कर्मचारी भी इस व्यवस्था से हैरान हैं, लेकिन बेड की कमी के कारण कोई आपत्ति नहीं जता रहा।
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जानिएः क्या कहते हैं मानक
डेंगू के रोगी के बेड पर मच्छरदानी का उपयोग अवश्य करें। साथ ही घर के अन्य सदस्य भी मच्छरों से बचाव के लिए हरसंभव तरीका अपनाएं, ताकि मच्छर रोगी को काटने के बाद परिवार के अन्य लोगों में यह बीमारी न फैला सके। वहीं अस्पताल में ऐसे मरीजों को आइसोलेशन वार्ड में मच्छरदानी में रखना चाहिए, ताकि वहां भी अन्य मरीज संक्रमित न हो सके।
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कोविड की चरमस्थिति में स्वास्थ्य विभाग ने नियंत्रण के लिए प्रत्येक स्तर पर तैयारी पुख्ता की थी। डेंगू को लेकर भी हम बेहद सजग हैं। बेड की कमी जल्द ही दूर कर ली जाएगी। इसमें जनता का भी सहयोग चाहिए। उनकी जागरूकता के बल पर ही डेंगू पर आसानी से नियंत्रण मिल सकेगा। -डॉ. सुमन सिंह, निदेशक, स्वास्थ्य