फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हरियाणा में डीएपी को लेकर मारामारी: स्टॉक में 40 हजार मीट्रिक टन खाद, मांग तीन लाख की

Mon, 11 Oct 2021 01:38 AM IST
Trainee Trainee न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

कुरुक्षेत्र, अंबाला, करनाल के साथ-साथ रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, हिसार, पलवल समेत अन्य जिलों में डीएपी की मांग बढ़ रही है। जैसे ही केंद्रों पर खाद पहुंच रहा है, उसे हाथों हाथ खरीद लिया जाता है। बड़ी दिक्कत यह है कि गांवों में स्थित 700 पैक्स समितियों पर खाद का स्टॉक नहीं है।
विज्ञापन
खाद-सांकेतिक - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हरियाणा में धान कटाई सीजन के बीच में ही रबी की फसलों के लिए डीएपी खाद को लेकर मारामारी शुरू हो गई है। आपूर्ति कम होने के कारण प्रदेश सरकार के स्टॉक में इस समय मात्र 40 हजार मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है, जबकि सीजन में तीन लाख एमटी डीएपी की जरूरत रहती है। आलू और सरसों की अगेती किस्म की बिजाई के लिए किसानों की सरकारी खरीद केंद्रों और प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पैक्स) पर लाइनें लग रही हैं, लेकिन उन्हें खाद नहीं मिल रहा है। अभी से खाद को लेकर ये हालात हैं तो गेहूं बिजाई के सीजन में स्थिति और विकट हो सकती है।
विज्ञापन



प्रदेश में धान कटाई का सीजन चल रहा है। जैसे ही धान की फसल से जमीन खाली हो रही है, किसान आलू और सरसों की अगेती किस्मों की बिजाई की तैयारी में है। कुरुक्षेत्र, अंबाला, करनाल के साथ-साथ रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, हिसार, पलवल समेत अन्य जिलों में डीएपी की मांग बढ़ रही है। जैसे ही केंद्रों पर खाद पहुंच रहा है, उसे हाथों हाथ खरीद लिया जाता है।


बड़ी दिक्कत यह है कि गांवों में स्थित 700 पैक्स समितियों पर खाद का स्टॉक नहीं है। ऐसे में खाद खरीदने को लेकर इधर से उधर भागदौड़ कर रहे हैं। सरकारी खरीद केंद्रों पर डीएपी का एक बोरा 1200 रुपये में मिलता है। उधर, कुछ निजी कारोबारी डीएपी को ब्लैक में बेचने की फिराक में हैं। प्रदेश में इफको, एनएफएल, चंबल समेत कई कंपनियां खाद की आपूर्ति करती हैं।
विज्ञापन



यह भी पढ़ें: जींद: भाजपा कार्यशाला का किसानों ने किया विरोध, पुलिस ने पिछले गेट से निकाले नेता, दीवार कूदकर निकले कार्यकर्ता


कच्चा माल महंगा, उत्पादन कम

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा माल महंगा होने से बढ़े डीएपी के दाम
कृषि विभाग के अधिकारी बताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीएपी में इस्तेमाल होने वाले फॉस्फोरिक एसिड और रॉक फॉस्फेट की कीमत चढ़ने से यह परिस्थितियां पैदा हुई हैं। देश में इसकी उपलब्धता काफी कम है। ये दोनों उत्पाद बाहर से मंगाए जाते हैं। इस बार डीएपी का उत्पादन पिछले सालों के मुकाबले कम है। इसी कारण कंपनियों से प्रदेश को कम सप्लाई आ रही है। 
विज्ञापन

कुछ दिन में सभी पैक्स पर पहुंचेगा खाद : यादव
हरको बैंक के चेयरमैन अरविंद यादव ने कहा कि डीएपी खाद की सुचारु उपलब्धता को लेकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल और कृषि मंत्री जेपी दलाल से बात हुई है। आगामी कुछ दिन में सभी 700 पैक्स पर डीएपी खाद पहुंच जाएगी। रबी सीजन में किसानों को खाद की कोई कमी नहीं रहेगी।
 

प्रदेश में डीएपी और यूरिया की कोई कमी नहीं है। किसानों द्वारा एक साथ ही अधिक मात्रा में डीएपी खरीदे जाने के कारण कुछ स्थानों पर दिक्कत आई है। सरकार के पास खाद का पर्याप्त स्टाक है और लगातार कंपनियां खाद की आपूर्ति दे रहे हैं। किसान जरूरत होने पर ही डीएपी खरीदें, इसे स्टॉक न करें, ताकि सभी को समय पर खाद मिल सके। 
- मनजीत नैन, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग।

 

हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और अन्य प्रदेशों में खाद नहीं मिलने से किसानों को परेशानी उठानी पड़ रही है। सरसों की बिजाई करने वाले किसानों को खाद नहीं मिल रहा है, ऐसे में वे कैसे अगेती किस्म की बिजाई करेंगे। अभी से ही ये हालात हैं तो जब गेहूं का सीजन शुरू होगा तो क्या होगा? सरकार इसे गंभीरता से ले, ताकि किसानों को दिक्कत न हो। 
- गुरनाम सिंह चढूनी, प्रदेशाध्यक्ष, भाकियू।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें