नियमों के मुताबिक थर्मल प्लांट में 25 से 30 दिन का कोयला होना जरूरी है। कोयले की इस भारी कमी के मद्देनजर पावरकॉम ने रोपड़ की चार में से दो और लहरा मुहब्बत की एक यूनिट को बंद कर दिया गया है। वहीं शनिवार को तलवंडी साबो की भी एक यूनिट बंद कर दी गई है। अब तलवंडी साबो प्लांट की दो यूनिट को आधी क्षमता के साथ चलाया जा रहा है। इसी तरह से गोइंदवाल साहिब की दोनों यूनिटों को आधी क्षमता पर कर दिया गया है।
पावरकॉम को शुक्रवार के 3,488 मेगावाट के मुकाबले शनिवार को प्राइवेट थर्मल प्लांटों से 2,297 मेगावाट बिजली ही मिली, जबकि सरकारी थर्मलों से मात्र 934 मेगावाट और हाइडल से 228 मेगावाट बिजली मिली। शनिवार को बिजली की मांग 8,000 मेगावाट के करीब रही। बिजली उत्पादन कम होने के कारण पावरकॉम को बाहर से 3,000 मेगावाट बिजली खरीदनी पड़ी। खास बात यह है कि पावरकॉम बाहर से 6,800 मेगावाट तक बिजली खरीद सकता है लेकिन इन दिनों पूरे देश में ही कोयले के संकट की वजह से बिजली पैदावार कम हो रही है। इसलिए बाहर से कम बिजली मिल पा रही है।
मांग के मुकाबले बिजली की उपलब्धता कम होने के कारण पावरकॉम को कट लगाने पड़े। शहरों में जहां दो से तीन घंटे तक के कट लगे, वहीं गांवों में तीन से चार घंटे की बिजली कटौती का लोगों को सामना करना पड़ा। उधर, इस गंभीर संकट को देखते हुए पावरकॉम ने उपभोक्ताओं से बिजली की बचत के लिए एसी बंद करने और लाइटों व अन्य बिजली उपकरणों का संयम से इस्तेमाल करने की अपील की है। विशेषज्ञों के मुताबिक अगर यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में बिजली के लंबे कट के लिए लोग तैयार रहें।