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SC में री-ओपन हुई डबवाली अग्निकांड की फाइल, वजह हैरान करने वाली

Mon, 26 Sep 2016 02:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, डबवाली (सिरसा)
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Dabwali fire accident - फोटो : File Photo
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डीएवी मैनेजिंग कमेटी की अपील के बाद सुप्रीम कोर्ट में डबवाली अग्निकांड पर हुए फैसले की फाइल री-ओपन हो गई है, जिसकी सुनवाई सात अक्तूबर को होगी। वहीं अग्निकांड पीड़ित देश की शीर्ष अदालत में फैसला होने के तीन साल बाद भी मुआवजा जमा न करवाए जाने की सूरत में बकाया मुआवजा राशि पर ब्याज मांग सकते हैं।
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गत 9 नवंबर 2009 को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर तथा जस्टिस कंवलजीत सिंह आहलूवालिया की पीठ ने डबवाली अग्निकांड पर फैसला सुनाते हुए मुआवजा तय किया था। मुआवजा छह प्रतिशत ब्याज की दर से डीएवी मैनेजिंग कमेटी तथा हरियाणा सरकार को देना था। साथ में यह भी आदेश दिए थे कि अगर मुआवजा राशि चार माह के भीतर जमा नहीं हुई तो ब्याज की दर बढ़कर 10 प्रतिशत हो जाएगी।

हरियाणा सरकार ने अपने हिस्से की 45 प्रतिशत मुआवजा राशि करीब 21 करोड़ 30 लाख रुपये जमा करवा दी। डीएवी इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चला गया। 15 मार्च 2010 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर डीएवी ने डबवाली अदालत में 10 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि जमा करवाई। देश की शीर्ष अदालत में यह मामला करीब तीन साल लंबित रहा। वर्ष 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले को मानते हुए डीएवी की याचिका खारिज कर दी।
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​क्या है डबवाली अग्निकांड मामला

Dabwali fire accident
अग्निकांड पीड़ितों ने 10 प्रतिशत ब्याज सहित 21.29 करोड़ रुपये मुआवजा राशि मांगी। डीएवी ने 6 प्रतिशत ब्याज की दर से 17 करोड़ रुपये जमा करवा दिए। शेष चार करोड़ 29 लाख रुपये की मुआवजा राशि को गलत बताते हुए स्थानीय अदालत में केस दायर कर दिया। डबवाली अदालत का निर्णय पीड़ितों के पक्ष में आया।

इसके खिलाफ डीएवी ने जिला एवं सत्र न्यायालय सिरसा में अपील दाखिल कर दी, लेकिन करीब डेढ़ साल बाद खुद ही केस वापस ले लिया। मुआवजे के विरोध में अब डीएवी मैनेजिंग कमेटी फिर सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गई है। डीएवी ने सिविल अपील दाखिल की है, जिस पर सात अक्तूबर को सुनवाई होगी। पिछले बीस सालों से डबवाली अग्निकांड पीड़ितों तथा डीएवी मैनेजिंग कमेटी में कानूनी लड़ाई चल रही है।

23 दिसंबर 1995 को चौटाला रोड पर स्थित एक मैरिज पैलेस में आयोजित डीएवी स्कूल के वार्षिक कार्यक्रम में आगजनी हुई थी। इसमें 442 लोगों की मौत हो गई थी। मरने वालों में सर्वाधिक बच्चे तथा महिलाएं थी। करीब डेढ़ सौ से ज्यादा लोग घायल हुए थे। तत्कालीन सरकार ने अग्निकांड पीड़ितों का मुफ्त में इलाज बंद कर दिया था, तो 1996 में डबवाली फायर ट्रेजडी विक्टम एसोसिएशन ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। तब से लेकर अब तक अग्निकांड पीड़ितों तथा डीएवी मैनेजिंग कमेटी में कानूनी लड़ाई जारी है।

डीएवी मैनेजिंग कमेटी जानबूझकर हमें परेशान कर रही है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद अग्निकांड पीड़ितों को वर्षों से अदालतों के चक्कर लगवा रही है। एक बार फिर मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है। हमें कानून पर भरोसा है। -विनोद बांसल, प्रवक्ता, डबवाली फायर ट्रेजडी विक्टम एसोसिएशन
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