ओलावृष्टि और तेज आंधी के कारण खेतों में खड़ी बासमती की फसल जमीन पर बिछ गई। ओलावृष्टि से धान की बालियों के दाने जमीन पर गिर गए, जिन्हें देख किसानों के चेहरों पर उदासी छा गई। किसानों का कहना है कि उनकी आधी फसल नष्ट हो गई है। खेतों में बिछी बासमती की फसल अब मशीन नहीं बल्कि हाथों से काटनी पड़ेगी। जिले में गुरुहरसहाए, झोक हरिहर के अलावा जलालाबाद व मंडी लाधुका में ओलावृष्टि से बासमती को भारी नुकसान पहुंचा है।
किसान हरकृष्ण सिंह, निशान सिंह, करनैल सिंह व जिले सिंह ने बताया कि ओलावृष्टि और तेज आंधी से बासमती को भारी नुकसान हुआ है। ओलावृष्टि से बासमती की बालियों के दाने झड़कर जमीन पर गिर गए। इससे झाड़ कम होगा। हरकृष्ण सिंह ने बताया कि उनकी 54 एकड़ जमीन पर बासमती की फसल लगी है। ओलावृष्टि व तेज आंधी से एक तिहाई हिस्सा खराब हो चुका है। इससे उसे काफी नुकसान झेलना पड़ेगा।
तेज आंधी से बासमती की फसल जमीन पर बिछ गई है। अब इसे कंबाइन के बजाय हाथों से कटाई करनी होगी। मशीन से कम लागत लगती थी और हाथ से कटाई करने पर ज्यादा मजदूरी देनी होगी। किसान सुरजन सिंह, कृपाल सिंह, महेंद्र सिंह ने बताया कि बरसात के कारण अब कटाई और देरी से करनी होगी। ओलावृष्टि से बासमती फसल का झाड़ पर काफी असर पड़ेगा। उनकी मांग है कि सरकार ओलावृष्टि से नुकसान हुई फसल की गिरदावरी कर उचित मुआवजा दे।