देह व्यापार करवाने और रिश्वत लेने के आरोप में घिरे चंडीगढ़ के तीन पुलिसकर्मियों को आखिरकार 50 दिन बाद सस्पेंड कर दिया गया है। ये पुलिसकर्मी चंडीगढ़ के सेक्टर-30 स्थित एक स्पा सेंटर से रिश्वत लेते हुए एक वीडियो में कैद हुए थे। हैरानी की बात यह है कि वीडियो व अन्य सबूतों के बावजूद ये पुलिसकर्मी करीब दो महीने तक थाने में ड्यूटी करते रहे।
शिकायतकर्ता के मुताबिक उसने घटना के तुरंत बाद ही डीएसपी को वीडियो भेजकर मामले की जानकारी दी थी लेकिन डीएसपी ने इसे ऑफिशियल शिकायत नहीं माना और कार्रवाई के लिए पब्लिक विंडो पर शिकायत देने को कहा। इस दौरान पुलिसकर्मियों को निलंबित करने के बजाय उनसे पूछताछ की जाती रही।
डीएसपी की पूछताछ में सामने आए तथ्य
शिकायतकर्ता की आधिकारिक शिकायत के बाद डीएसपी ने तीनों पुलिसकर्मियों से गहन पूछताछ की। इस दौरान डीएसपी ने माना कि रिश्वत मांगने की ऑडियो और वीडियो में उन्हीं पुलिसकर्मियों की आवाज है। पुलिसकर्मियों से पैसों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने दावा किया कि ये पैसे उन्होंने उधार के तौर पर वापस लिए थे और इसका इस्तेमाल बीट बॉक्स की मरम्मत में किया जाना था। हालांकि, डीएसपी ने उनकी इस सफाई को सही नहीं पाया और अपनी जांच रिपोर्ट में उन्हें दोषी माना।
यह है मामला
8 अप्रैल, 2025 को शिकायतकर्ता करनाल के रहने वाले बलिंद्र अपने दोस्त के साथ सेक्टर-30 के एक स्पा सेंटर में गए थे। वहां इंडस्ट्रियल एरिया थाने में तैनात हेड कांस्टेबल प्रदीप, मुखराम और सुरेश पहुंचे। बलिंद्र ने आरोप लगाया कि प्रदीप ने तत्कालीन एसएचओ की मंथली के नाम पर 12,000 और सुरेश व मुखराम ने बीट बॉक्स की फीस के तौर पर 7,000 रुपये लिए। बलिंद्र ने इन पुलिसकर्मियों की रिश्वत लेते हुए वीडियो बना ली। बलिंद्र ने यह भी आरोप लगाया कि एक पुलिसकर्मी ने स्पा में एक लड़की के साथ अनैतिक काम किया, हालांकि इस घटना का कोई वीडियो सामने नहीं आया है।
अधिकारियों का बयान
डीएसपी दिलबाग सिंह ने बताया कि उन्होंने जांच में पुलिसकर्मियों को दोषी पाया और कार्रवाई के लिए रिपोर्ट एसएसपी को भेज दी थी। उन्होंने कहा कि सभी तथ्यों को वेरिफाई करने में समय लगा। वहीं, एसएसपी कंवरदीप कौर ने कहा कि शिकायतकर्ता ने पहले कोई आधिकारिक शिकायत नहीं दी थी। उन्होंने बताया कि डीएसपी की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही तीनों पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया।