उन्होंने सोमवार रात को करीब नौ बजे गांव खैयाला से एक महिला से अगवा किया तीन दिन का नवजात को बरामद किया और उसके वारिसों के हवाले कर दिया। पुलिस की जांच में यह सामने आया है कि प्रगट सिंह की पहली पत्नी ने यह सारा ताना-बाना बुना था क्योंकि प्रगट सिंह अपनी पत्नी की छोटी बहन गोगी के साथ लिविंग रिलेशनशिप में रह रहा था और चार दिन पहले ही गोगी ने बटाला के अस्पताल में प्रगट सिंह के बच्चे को जन्म दिया था। गोगी की बहन नहीं चाहती थी कि यह बच्चा प्रगट और गोगी के पास रहे और उनका वंश आगे बढ़े।
वह उस बच्चे को अगवा करवाकर आगे किसी महिला को बेचना चाहती थी। अपनी योजना को सफल करने के लिए प्रगट की पहली पत्नी ने बच्चे को अगवा करने के लिए रजिंदर कौर, रूपिंदर कौर निवासी चीमा खुडी से संपर्क किया और पैसों का लालच देकर उनको यह काम करने के लिए कहा। रूपिंदर कौर गांव चीमा खुडी में आशा कार्यकर्ता के तौर पर काम कर रही है।
दोनों ने आगे परमजीत कौर निवासी अमृतसर और रोजी नामक दो महिलाओं को बच्चे को अगवा करने का काम सौंपा। सोमवार को रोजी और परमजीत कौर ने ही अस्पताल से तीन दिनों के शिशु को उठाया था। सोमवार को शिशु को उठाने के बाद बच्चे को रूपिंदर कौर और रजिंदर कौर के हवाले कर दिया। एसएसपी ने आगे बताया कि पूछताछ में यह भी सामने आया कि नवजात शिशु को आगे किसी व्यक्ति को जालंधर की एक महिला को बेचना था।