अमृतसर के चर्चित किडनी कांड में अदालत ने डॉ. भूपिंदर सिंह और डॉ. भूषण अग्रवाल को 10-10 साल की कैद सुनाई। दोषी डॉक्टरों पर 40-40 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। करीब 19 साल पहले सिविल लाइन में दर्ज मामले के कई आरोपियों की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है।
जिला व सत्र न्यायाधीश दरबारी लाल की अदालत ने गैर-कानूनी रूप से किडनी ट्रांसप्लांट करने के एक अन्य मामले में दोनों दोषी डॉक्टर को 5-5 साल कैद की सजा सुनाई। इस मामले में अमृतसर बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान एडवोकेट प्रदीप सैनी, हरदयाल मेहता, सरकारी मेडिकल कॉलेज, अमृतसर के पूर्व प्रिंसिपल डॉ. जगदीश गार्गी, गौरव राज, पंकज गुप्ता और विनोद सहित सात लोगों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया है।
साल 2003 में सिविल लाइन थाने की पुलिस ने ग्रीन एवेन्यू में कक्कड़ अस्पताल के डॉ. भूपिंदर सिंह, डॉ. भूषण अग्रवाल, डॉ. प्रवीण सरीन, डॉ. पीके जैन, अस्पताल के मैनेजर हरदयाल मेहता, एडवोकेट प्रदीप सैनी, सरकारी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. जगदीश गार्गी, डॉ. ओपी महाजन, गौरव राज, पंकज गुप्ता और विनोद के खिलाफ हत्या के प्रयास का केस दर्ज किया था।
इन लोगों पर आरोप था कि ये लोग गैर-कानूनी रूप से किडनी ट्रांसप्लांट करते हैं। इससे कई लोगों की जान चली गई थी। डी डिवीजन थाने की पुलिस ने भी गैर-कानूनी रूप से किडनी ट्रांसप्लांट किए जाने को लेकर एक केस दर्ज किया। इस मामले के आरोपी डॉ. पीके सरीन, पीके जैन और एडवोकेट राजन पुरी की मौत हो चुकी है।