अब शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान भाई गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने मीटिंग कर फैसला लिया है कि एसजीपीसी केंद्र सरकार से बात करेगी और उनको लिखित पत्र भेजा जाएगा कि भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव को शहीद का दर्जा दिया जाए। इस फैसले के बाद विवाद खड़ा हो गया है। एसजीपीसी की सदस्य बीबी किरणजोत कौर का कहना है कि भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को शहीद का दर्जा दिलाना एसजीपीसी का काम नहीं है। सिखों के शहीदों को सरकारी मान्यता की जरूरत ही नहीं है। भगत सिंह सिख मर्यादा मुताबिक सिख रोल मॉडल नहीं हैं।
प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. लखविंदर जौहल का कहना है कि एसजीपीसी का काम सिख धर्म का प्रसार है। एसजीपीसी को उसकी तरफ ध्यान देना चाहिए। भगत सिंह पूर्ण मर्यादा वाले सिख नहीं थे। वहीं प्रसिद्ध लेखिका बब्बू तीर का कहना है कि एसजीपीसी का यह कदम सराहनीय है। भगत सिंह पूरे देश के हीरो हैं और युवाओं के दिलों की धड़कन है। उनके लिए अगर एसजीपीसी कदम उठा रही है तो इससे बेहतर क्या हो सकता है। उलटा सिख विद्वानों को चाहिए कि वह एकजुट होकर एसजीपीसी के साथ खड़े हो जाएं।
पंजाब के प्रसिद्ध लेखक और हिंद पाक दोस्ती मंच के महासचिव सतनाम मानक का कहना है कि एसजीपीसी का कार्य धर्म प्रसार के साथ साथ सभ्याचार और देश की विरासत को संभालना भी है। एसजीपीसी अगर पर्यावरण पर कार्य कर रही है, शिक्षा में कार्य कर रही है तो देश के नायकों को शहीद का दर्जा क्यों नहीं दिला सकती। एसजीपीसी ने हाल ही में प्राकृतिक आपदा के लिए विंग का गठन किया है।