श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के मुख्य आयोजन को एसजीपीसी के साथ साझे तौर पर कराने के पंजाब सरकार के सारे प्रयास विफल हो गए हैं। इसे लेकर सोमवार को पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कड़े तेवर दिखाए। उन्होंने एसजीपीसी पर निशाना साधते हुए कहा कि धार्मिक संस्था बादलों के हाथों में खेलकर गुरु साहिब जी के 550वें प्रकाश पर्व के ऐतिहासिक मौके का मजाक बना रही है।
इस बीच सूत्रों का कहना है कि साझा आयोजन के सभी प्रयास असफल रहने के बाद राज्य सरकार अपनी विधायी शक्ति का इस्तेमाल करते हुए मुख्य आयोजन की बागडोर अपने हाथ में ले सकती है। इसके लिए विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान प्रस्ताव लाया जा सकता है। जानकारी के अनुसार, 550वें प्रकाश पर्व के ऐतिहासिक आयोजन के उद्देश्य से किए जा रहे राज्य सरकार के कार्यों और बीते समय के दौरान अनेक धार्मिक आयोजनों की बागडोर राज्य सरकार द्वारा ही संभालने की परंपरा का हवाला देते हुए प्रदेश सरकार विधानसभा में प्रस्ताव पेश करने अधिकार रखती है।
इसके लिए सदन पटल पर रखे जाने वाले कागज-पत्रों के तहत ऐसे प्रस्ताव को सूचीबद्ध करना भी जरूरी नहीं है। ऐसे प्रस्ताव सदन में संसदीय मामलों के मंत्री द्वारा पेश किए जा सकते हैं, जिस पर ध्वनिमत से सदन के सदस्यों की सहमति ली जा सकती है। अगर राज्य सरकार प्रकाश पर्व के मुख्य आयोजन की मेजबानी संबंधी प्रस्ताव सदन में लाती है तो मौजूदा संख्या बल को देखते हुए उसे प्रस्ताव पारित कराने में कोई कठिनाई नहीं होगी। उल्लेखनीय है कि 550वें प्रकाश पर्व के ऐतिहासिक आयोजन के लिए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में राज्य सरकार निरंतर काम कर रही है।
वहीं, अकाली दल द्वारा काफी समय से यह मांग उठाई जाती रही कि धार्मिक आयोजन में सरकार को दखल नहीं देना चाहिए और यह सारा आयोजन एसजीपीसी के नेतृत्व में कराया जाए। मुख्यमंत्री ने इस पर असहमति जताते हुए साझा आयोजन की पेशकश की लेकिन एसजीपीसी ने इस पेशकश को ठुकरा दिया। इस संबंध में मुख्यमंत्री द्वारा एसजीपीसी के साथ बुलाई गई बैठक भी असफल रही और साझा आयोजन के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक में अकाली दल नदारद रहा।