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चन्नी काट सकते हैं सीनेटर विधायकों के नाम

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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय में सीनेट गठन की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। इसी सीनेट में पंजाब सरकार की ओर से नामित किए गए सदस्य एवं विधायक दलवीर सिंह व हर प्रताप सिंह के नाम बदलने को लेकर चर्चाएं हैं। जानकारों का कहना है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार ने इन नामों की घोषणा की थी। इस समय पंजाब सरकार का रुख अलग है। वह कैप्टन के निर्णयों को बदलने पर काम कर रही है।
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इसी साल मार्च में पंजाब सरकार ने विधायक दलवीर सिंह और हरप्रताप सिंह का नाम पीयू सीनेट के लिए नामित किया था। सबसे पहले पंजाब सरकार की ओर से ही नाम आए थे। उसके बाद पीयू ने चुनाव की प्रक्रिया की ओर कदम बढ़ाया। सूत्रों का कहना है कि पीयू सीनेट में उन सदस्यों को भेजा जाता है जो पीयू की जानकारी रखते हों और सरकार के करीबी हों। हालांकि कई अन्य कारण भी इसके बनते हैं। इसका प्रस्ताव बाकायदा विधानसभा में जाता है।
बताया जाता है कि पीयू सीनेट में आने के लिए पंजाब के तीन से चार विधायक कोशिश कर रहे हैं। वे सिफारिश भी लगवा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि यह विधायक कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पंजाब नवजोत सिंह सिद्धू ग्रुप से हैं। हालांकि अभी यह तय नहीं है कि चयनित विधायक किस खेमे से हैं। प्रोफेसरों के बीच चर्चा है कि पंजाब सरकार की ओर से आए सदस्यों के नाम बदल सकते हैं।
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स्नातक वर्ग का चुनाव प्रभावित होगा
पीयू स्नातक वर्ग का चुनाव दो चरणों में करवाएगी। जानकारों का कहना है कि इससे चुनाव के परिणाम प्रभावित होंगे। पहले चरण के बाद प्रत्याशियों का फोकस दूसरे चरण के 61 बूथों पर होगा। आसानी से मतदाताओं को अपने पाले में किया जा सकेगा। वहीं दूसरी ओर भाजपा, कांग्रेस के अलावा दो से तीन ग्रुप भी इस वर्ग का चुनाव जीतकर अपना दबदबा सीनेट में कायम करने की योजना बना रहे हैं। बताया जाता है कि अब उत्तराखंड में भी चुनाव बूथ बनाए जा सकेंगे। वहां अधिकारियों की बातचीत हो गई है। अक्तूबर में ही सीनेट की पहली बैठक हो सकती है।
पूर्व एमपी ने कहा- सीनेट में सिखों को तवज्जो कम मिली
पंजाब के एक पूर्व एमपी ने सोशल मीडिया के जरिए कहा है कि सीनेट में मनोनीत सदस्यों की सूची में सिखों को कम स्थान दिया गया। अनुसूचित जाति के सदस्यों की संख्या भी महज एक है। इसका जवाब सोशल मीडिया पर भाजपा के दिग्गज दे रहे हैं। उधर, मनोनीत सदस्यों की सूची में कुछ भाजपा सदस्यों के नाम न आने पर उनमें नाराजगी है। हालांकि उन्हें दूसरे पद दिए जा सकते हैं।
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