इनका नशे के चक्कर में पड़कर जीवन हुआ बर्बाद
केस-1
पिछले साल से एनडीपीएस एक्ट के मामले में फंसे सेक्टर-25 निवासी 22 वर्षीय सोनू (परिवर्तित नाम) के परिजनों ने बताया कि सोनू कॉलेज में प्रथम वर्ष का छात्र है। उसे झूठे तरीके से मामले में फंसाया गया है। सोनू अकेला बेटा है। उसके साथ जो भी हो रहा है इससे हम सब का जीवन रुक गया है। ऐसा लगता है कि हमारा परिवार समाज से 10 साल पिछड़ गया है।
केस-2
मलोया निवासी 24 वर्षीय रोहित (परिवर्तित नाम) को 3 वर्ष पहले पुलिस ने चरस के साथ गिरफ्तार किया था। मामला कोर्ट में चला। इसके बाद उसे ढाई साल की जेल हो गई। रोहित के पिता बताते हैं कि इसका सब का असर परिवार पर पड़ा है। इस एक मामले ने रोहित का भविष्य खत्म कर दिया है।
केस-3
हिमाचल निवासी 19 साल के विकास (बदला हुआ नाम) इंजीनियरिंग कॉलेज का छात्र है। 6 महीने पहले विकास ने दोस्तों के साथ पार्टी में पहली बार इंजेक्शन के जरिए हेरोइन लिया था। धीरे-धीरे यह उसकी आदत में शामिल होता गया। विकास को नए दोस्त बनाने के लिए यह करना पड़ा था। मौजूदा समय में विकास का इलाज पीजीआई के नशा उन्मूलन केंद्र में चल रहा है। इलाज के दौरान वह कुछ महीने तक नशे से दूर रहा, लेकिन हॉस्टल में जाने के बाद उसने इंजेक्शन के जरिए नशा ले लिया। जिस कारण उसे ओवरडोज हो गया और हालत बिगड़ गई। परिजनों ने उसे पीजीआई में भर्ती करवाया है।
केस-4
लुधियाना निवासी मनजीत कौर (बदला हुआ नाम) को पता भी नहीं था कि उसके पति देवेंदर (बदला हुआ नाम) धीरे-धीरे नशे के आदी हो गए हैं। मनजीत ने काम के दबाव को कारण माना, लेकिन जब धीरे-धीरे स्थिति मारपीट और कीमती चीजों को बेचने तक पहुंच गई तो मनजीत ने इसकी जानकारी परिजनों को दी। जिसके बाद पता चला कि उसका पति नशे का आदी हो चुका है। पति की मर्जी के खिलाफ मनजीत और उसके परिजन देवेंदर को लेकर पीजीआई पहुंचे, जहां उसे भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।
इन्होंने दी नशे को मात, आज जी रहे सिर उठाकर
सेक्टर-37 निवासी 30 वर्षीय दीपू (बदला हुआ नाम) ने बताया कि वह पहले शराब पीता था। उसके दोस्त हेरोइन पीते थे। दोस्तों ने कहा कि एक लाइन लगाकर देख। उसने शराब के नशे में एक लाइन लगाई। इसके बाद हेरोइन पीने लग गया। दोस्त उसे बोलने लगे कि हेरोइन पीनी है तो पैसे भी शेयर कर। तब उसका दो साल का बच्चा भी था। वह पूरी तरह से हेरोइन के नशे में डूब गया। उसने सोचा कि अब हेरोइन पीनी है तो हेरोइन बेचना ही शुरू कर देते हैं। जितना मुनाफा आएगा उससे वह नशा कर लेगा। वह हेरोइन बेचने के साथ उससे होने वाले मुनाफे से खुद नशा करने लगा। घर परिवार और समाज में लोगों ने उसे बुलाना छोड़ दिया और उसकी इज्जत कम हो गई। इसके बाद उसने नशा छोड़ने की ठानी। फिर दो साल तक नशा छोड़ने की दवाई ली। दीपू ने कहा कि लॉकडाउन के कारण मजबूरन उसका नशा छूट गया। दीपू का कहना है कि नशे की लत दोस्ती के चक्कर में ही लगती है।
बाउंसर की ड्यूटी के दौरान पीने लगा चरस
सेक्टर-56 निवासी 28 वर्षीय बाउंसर गुरी (बदला हुआ नाम) ने कहा कि वह क्लबों में बाउंसर का काम करता था। क्लब में पार्टी करने आने वाले युवा उसके भी अच्छे दोस्त बन गए। उन्होंने कहा कि ले सिगरेट पीकर देख। पहले वह मना करता रहा, लेकिन धीरे धीरे उसने सिगरेट पीना शुरू कर दिया। इसके बाद क्लब में ही आने वाले कुछ युवकों ने उसे सिगरेट में चरस डालकर पीने के लिए कहा। उसने चरस भी पीना शुरू कर दिया। वह चरस के लिए रात भर दोस्तों को फोन कर पूछता रहता था कि क्या चरस पड़ी है। धीरे धीरे घर के आसपास के लोगों ने उसे नशेड़ी कहना शुरू कर दिया। उसे अपनी बेइज्जती बर्दाश्त नहीं हुई। उसने अपनी इस बुरी आदत को छोड़ने के लिए फिर से जिम जाना शुरू किया। धीरे-धीरे उसकी नशे की लत कम होती गई।