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स्वच्छता सर्वेक्षण में चंडीगढ़ का बुरा हाल: इन कारणों से पिछड़ा सिटी ब्यूटीफुल, अफसरशाही की इच्छाशक्ति ने किया बंटाधार

Sun, 21 Nov 2021 02:03 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

हर साल सफाई पर करोड़ों रुपये फूंकने के बावजूद चंडीगढ़ की सफाई व्यवस्था दिनोंदिन बदहाल होती जा रही है। कुछ साल पहले तक टॉप टेन शहरों की सूची में रहने के बाद अब शहर टॉप 50 शहरों में भी नहीं है। 
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चंडीगढ़ में सफाई का बुरा हाल। - फोटो : अमर उजाला
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स्वच्छता सर्वेक्षण 2020-21 के परिणामों ने चंडीगढ़ की पोल खोल दी है। देशभर के शहरों की ओवरऑल रैंकिंग में चंडीगढ़ 66वें स्थान पर रहा है। वहीं, दस लाख से अधिक की आबादी वाले 48 शहरों की सूची में शहर आठवें स्थान से लुढ़ककर 16वें स्थान पर पहुंच गया है। इस सूची में वर्ष 2018 में चंडीगढ़ तीसरे पायदान पर था। चंडीगढ़ नगर निगम के पास संसाधनों की कमी नहीं है, लेकिन अधिकारियों की मंशा ही शहर को नंबर वन बनाने की नहीं है। निगम में योजनाएं तो बनीं, लेकिन कागजों तक सिमटकर रह गईं। उन पर कोई काम ही नहीं हुआ, जबकि इन योजनाओं के लिए आवश्यक संसाधनों पर करोड़ों खर्च भी किए गए, पर उसके बावजूद किसी ने सुध नहीं ली। शहर को नंबर वन बनाने की इच्छाशक्ति होती तो अधिकारी पल्ला झाड़ने के बजाय आगे आकर जिम्मेदारी लेते।
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रैंकिंग गिरने के प्रमुख कारण
  • आज भी 97 गाड़ी खड़ी हैं : निगम ने करोड़ों खर्च कर घरों से कचरा लेने के लिए 390 गाड़ियां ले लीं, लेकिन इसकी योजना तैयार नहीं की। अब भी 97 गाड़ी निगम के स्टोर में खड़ी चालकों का इंतजार कर रही हैं।
  • नहीं बना कर्मचारियों से तालमेल : गाड़ियां खरीदने के बाद सफाई कर्मचारियों से तालमेल बनाने में ही महीनों लग गए। उसके बावजूद कर्मचारियों की हड़ताल चलती रही। समझौता करने के लिए बैठकें होती रहीं।
  • लॉयंस पर नहीं लिया सख्त फैसला : दक्षिण के सेक्टरों में सफाई का काम देख रही लॉयंस कंपनी की लापरवाही पर निगम ने आंखें मूंद लीं। ज्यादा शिकायतों पर जुर्माना लगाकर छोड़ दिया, सख्त फैसला कभी लिया ही नहीं।
  • लोगों से नहीं किया संवाद : शहर के लोगों, मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन से निगम ने तालमेल ही नहीं बनाया गया। लोगों के संवाद न होने से उनमें जागरूकता की कमी रही।
  • तैयारियों पर खर्च, परिणाम शून्य : निगम ने स्वच्छता अभियान की तैयारियों पर लाखों रुपये खर्च कर स्वच्छता गीत बनाया, उससे लोगों को जागरूक करने की योजना भी बनी। गीत को लोगों की कॉलर ट्यून बनाने के साथ ही अधिकारियों को भी साझा करना था। यह किसी को दी ही नहीं गई।
  • स्वच्छता सर्वेक्षण सवारी गाड़ी का पता ही नहीं चला : निगम ने शहर में जागरूकता के लिए स्वच्छता सर्वेक्षण गाड़ी चलाकर स्वच्छता गीत से लोगों को जागरूक करने की योजना बनाई। गाड़ी कब चली और कितनी चली, किसी को कुछ नहीं पता।
  • लोगों ने भी नहीं निभाई जिम्मेदारी : चंडीगढ़ शिक्षित और जागरूक शहरों की श्रेणी में आता है। यहां लोगों ने अपने सुझाव और अनुभव साझा करने में कंजूसी की। इस कारण नंबर कटे।
  • प्लांट का नहीं निकाल सके हल : निगम ने कचरा निस्तारण प्लांट जेपी समूह से लेने के बाद खुद संचालित किया, लेकिन उसकी क्षमता पहले से भी घट गई। अब पूरा कचरा डंपिंग ग्राउंड पर जा रहा है।
  • खड़ा हो गया नया पहाड़ : डंपिंग ग्राउंड का एक पहाड़ समय सीमा में हटा नहीं। इधर निस्तारित न होने वाला कचरा डंपिंग ग्राउंड पर जाता रहा, जिस कारण दूसरा पहाड़ बन गया।
  • एनजीटी की फटकार, फिर भी नहीं कोई असर : एनजीटी लगातार फटकार लगाती रही, लेकिन अधिकारी अनसुना करते रहे। जुर्माने के डर से आनन-फानन में बिना योजना के गाड़ियां ले लीं।
  • अब भी मिल रहा मिक्स कचरा : गीला और सूखा कचरा अलग-अलग करने के लिए लोगों को जागरूक ही नहीं किया, जिससे मिक्स कचरा ही गाड़ियों में जाता रहा। अब भी कई जगह ऐसा हो रहा है। 
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